हिंदी कविता हम भारतवासी | Hindi Kavita Hum Bharatwasi

हिंदी कविता हम भारतवासी दर्द में भी खुशी मनाते हैं, इसीलिए हम भारतवासी कहलाते हैं। दर्द मतलब कुछ नहीं, हंसते हंसते सारी मुश्किलें पार कर जाते हैं, इसीलिए हम भारतवासी कहलाते हैं। फर्क नहीं पडता कौन क्या कहता है, हम तो सबको सुखी देखना चाहते हैं, इसीलिए हम भारतवासी कहलाते…

Continue Readingहिंदी कविता हम भारतवासी | Hindi Kavita Hum Bharatwasi

प्रेरक लघु कविता | Prerak Laghu Kavita | Inspirational Short Poems

Prerak Laghu Kavita आप पढ़ रहे हैं प्रेरक लघु कविता " पुराने विश्वासों की तोड़ जंजीरें " :- Prerak Laghu Kavitaप्रेरक लघु कविता पुराने विश्वासों की तोड़ जंजीरेंसकारातमक शब्द धारण करके,जाग्रत करो नये सपनों के चित्रप्रबल एहसास अवचेतन में भरके। प्रकृति का यह अदभुद रहस्यहरा भरा कर देता रेगिस्तान को,मानव की सच्ची कल्पनाओं सेहासिल करता…

Continue Readingप्रेरक लघु कविता | Prerak Laghu Kavita | Inspirational Short Poems

हास्य व्यंग्य कविता लक्ष्मी और सरस्वती | Hasya Vyangya

पढ़िए कवि और चोर की नोकझोंक वाली हास्य व्यंग्य कविता लक्ष्मी और सरस्वती ( Hasya Vyangya Kavita Laxmi Aur Saraswati ) :- हास्य व्यंग्य कविता लक्ष्मी और सरस्वती एक रात, एक चोर, कवि के घर, करने चला गया चोरी, उम्मीद थी कि, मिलेगी वहाँ नोटों से भरी कोई तिजोरी, मुझे…

Continue Readingहास्य व्यंग्य कविता लक्ष्मी और सरस्वती | Hasya Vyangya

पेड़ बचाओ पर बाल कविता – वृक्ष बचाएं हम

पेड़ों की रक्षा व वृक्षारोपण हेतु प्रेरित करती ( Ped Bachao Bal Kavita In Hindi ) पेड़ बचाओ पर बाल कविता " वृक्ष बचाएं हम " पेड़ बचाओ पर बाल कविता तुलसीपत्र में देव विराजित , समस्त रोगों का करती है नाश । तुलसी तुमको नित्य वन्दन है , समस्त…

Continue Readingपेड़ बचाओ पर बाल कविता – वृक्ष बचाएं हम

धूप की आत्मकथा कविता :- मैं धूप हूँ | Dhoop Par kavita

धूप की आत्मकथा कविता मैं धूप हूँ, अक्सर परछाईं से डर जाता हूँ, फिर भी परछाइयों के संग गुजर जाता हूँ। क्या होता है कहाँ, सब खबर है मुझको, हर डगर, हर नगर, हर शहर जाता हूँ। दूर तलक जहाँ खुश लोग नज़र आते हैं, वहाँ कुछ देर के लिए…

Continue Readingधूप की आत्मकथा कविता :- मैं धूप हूँ | Dhoop Par kavita

Phool Ki Abhilasha Kavita | फूल की अभिलाषा कविता |

Phool Ki Abhilasha Kavita - आप पढ़ रहे हैं फूल की अभिलाषा कविता :- Phool Ki Abhilasha Kavitaफूल की अभिलाषा कविता फूल हूँ मैं छोटा सा,यही मेरे जीवन की परिभाषा है।देवों के चरणों में चढ़ जाऊं,मेरे जीवन की छोटी सी अभिलाषा है। चाह नहीं मुझे की मैंगहने में गूँथा जाऊ,चाह नहीं सुन्दर नारी बन,स्वयं पर इठलाऊँ।उन पावन…

Continue ReadingPhool Ki Abhilasha Kavita | फूल की अभिलाषा कविता |

सकारात्मक सोच पर कविता | Sakaratmak Soch Par Kavita

सकारात्मक सोच पर कविता सोच ऐसी राखिए, सब आपसे स्नेह बनाए , सबके साथ मिल जुलकर आप मार्ग दर्शक बनजाए , हम हमेशा खुश रहे और दूसरों को भी खुश कर पाए, हम किसी को उठा न सके तो उसे गिराया भी न जाए।। हम जानते है कि, न सबको…

Continue Readingसकारात्मक सोच पर कविता | Sakaratmak Soch Par Kavita

जलियांवाला बाग पर कविता | Jallianwala Bagh Par Kavita

Poem On Jallianwala Bagh In Hindi - हत्याकांड से आहत जलियांवाला बाग कैसे अपना दर्द बयां कर रहा है पढ़िए जलियांवाला बाग पर कविता :- जलियांवाला बाग पर कविता लाख जनों के हृदयों में,सुलग रही एक आग हूँ।भारत माँ के चरणों में मै,जलता हुवा चिराग हूँ।निर्दोषों के रक्त से लथ-पथ,जिसकी…

Continue Readingजलियांवाला बाग पर कविता | Jallianwala Bagh Par Kavita

हिंदी कविता : ग़ज़ल की कहानी | Kavita Ghazal Ki Kahani

हिंदी कविता : ग़ज़ल की कहानी वक्त की उगलती आग गज़ल, तब होती बाग ओ बाग गज़ल। ईरान से लेकर आई है, भारत में ये बैराग गज़ल। कई साल लगाते हैं शायर, तब बनती है बेदाग़ गज़ल। अश्कों का दरिया आंखों में, दे जाता एक चराग गज़ल। उर्दू की है…

Continue Readingहिंदी कविता : ग़ज़ल की कहानी | Kavita Ghazal Ki Kahani

जोश भरी कविता | Josh Kavita In Hindi

जोश भरी कविता - आप पढ़ रहे हैं जोश भरी कविता - प्रबल इच्छा ने जब ललकारा :- Josh Kavita In Hindiजोश भरी कविता प्रबल इच्छा ने जब ललकारापिया मैने तब संकल्प का प्याला,विफल हुआ हूं नहीं मै हाराआलस को अब जीवन से टाला। आराम नहीं अब करना हैनिरंतर चलते रहना है,जैसे सरिता सागर से मिलतीवैसे मुझको भी बहना…

Continue Readingजोश भरी कविता | Josh Kavita In Hindi

हास्य कविता : लाइब्रेरी और राजनीति | Hasya Kavita

हास्य कविता : लाइब्रेरी और राजनीति अखबार में पढ़ा कि बंदरों ने किताबें फाड़ दी एक लाइब्रेरी में, समझ नहीं पाया, ये काम सही समय पर हुआ या देरी में। क्या बंदरों ने ये सोचा कि ये बेमतलब में किताबें छपाई क्यों, और अगर पढ़ना ही नहीं था तो लाइब्रेरी…

Continue Readingहास्य कविता : लाइब्रेरी और राजनीति | Hasya Kavita

ग़ज़ल – भूलने में ज़माने लगे हैं | Ghazal Zamane Lage Hain

ग़ज़ल - भूलने में ज़माने लगे हैं रक़ीबों से निस्बत बढ़ाने लगे हैं दिलो-जान उन पर लुटाने लगे हैं वो फिर से पलटकर क्यूँ याद आए जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं। रक़ाबत के मारे ये हमजाम याराँ हमें महफ़िलों से उठाने लगे हैं न दिन में तसल्ली न शब…

Continue Readingग़ज़ल – भूलने में ज़माने लगे हैं | Ghazal Zamane Lage Hain