कविता माँ तो है परछाई | Kavita Maa To Hai Parchhai
कविता माँ तो है परछाई कविता माँ तो है परछाई माँ तो है परछाई हमारीइसकी दया का मोल नहीं!मागें बिना हो मुरादें पूरीइसकी कृपा का तोल नहीं!! तन मन निज अर्पण करकेचरणों में शीश झुकाना सब,कहो शरण में तेरी आयें हैसंकट हरोगी मेरे कब,जुबां में रस भक्ति का भरदेतेरे सिवा…

