पटल को समर्पित कविता | Patal Ko Samarpit Kavita
पटल को समर्पित कविता पलता आया प्राण पिंजर में हर साँस ने मेरी गाया, एक से बढ़कर एक सुर-पाँखी पटल के मन को भाया। ढ़ली साँझ बन मुरली जैसी मधुर तान का फेरा, कलरव करते ओर चहकते चहूँ और परिंदी डेरा, अक्षर-मंत्र शब्द के टोने स्वर के बाण चलाया, रचनाओं…

