प्रेरणादायक कविता :- बहारों का मौसम | Prernadayak Kavita

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प्रेरणादायक कविता

प्रेरणादायक कविता

बहारों का मौसम फिर आएगा,
अभी पतझड़ का सम्मान करो।
तय हैं रात्रि के बाद होगा सवेरा,पर,
जब तक हैं रात्रि, क्यों अपमान करो।

काम-धंधा, भाग -दौड़, लेन-देन, यह तो,
जीवन का हिस्सा है चलता ही रहेगा।
थोड़ा है, थोड़े की और जरूरत है,
यह दुःख तो सदा खलता ही रहेगा।
मनुष्य मन तो चपल है, चंचल है,
यह कब रुका है, मचलता ही रहेगा।
पर अभी विश्राम का वक़्त मिला है ,
तो रुको तनिक, अवसान करो।
बहारों का मौसम फिर आयेगा,
अभी पतझड़ का सम्मान करो।।

महज एक बरस के मौसम में,
ऋतुएं परिवर्तित हो जाती है।
पतझड़, सावन, बशान्त ,बहार,
अलग- अलग रंग दिखलाती है।
लगता है जीवन के मौसम में भी,
ये दिन भी ऋतु बदलने आये है।
कल तक नहीं था कुछ स्वच्छ गगन में,
वहाँ आज काले बादल घिर आये है।
पर ज्येष्ट मास की ज्यादा गर्मी से भी,
तुम अच्छे सावन का अनुमान करो।
बहारों का मौसम फिर आयेगा,
अभी पतझड़ का सम्मान करो।।

घर पड़ोस औऱ देश विदेश में
है सब अदृश्य शत्रु के आगोश में।
घर पर रुककर क्या खो देंगे,
क्यों क्रुद्ध हो व्यर्थ आक्रोश में
बाहर जाकर क्या पा लेंगे।
सोचो इस समय थोड़ा होश में।
भामाशाहो ने तो लाखों का दान किया,
संकट में लड़ने वालों का सम्मान किया
तुम घर में रहकर इतना तो करो,
अपने सहयोग का ही अनुदान करो।
बहारों का मौसम फिर आएगा,
अभी पतझड़ का सम्मान करो।।

पढ़िए :- हौसला बढ़ाने वाली कविता ” हौसलों के पंख लगाकर “


रचनाकार का परिचय

राजेन्द्र भार्गव"कांकरा"राजेन्द्र भार्गव”कांकरा”
निवासी – ग्राम कांकरा, तहसील दांतारामगढ़, जिला सीकर, राजस्थान
शिक्षा – MA (इतिहास) कोटा विश्ववविद्यालय, B. ed (राजस्थान विश्वविद्यालय,जयपुर)

वर्तमान में राजस्थान पुलिस कोटा शहर में कार्यरत हूँ। हिंदी व राजस्थानी भाषा में कविताएँ लिखने का शौक़ है।

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