ग़ज़ल – क़सम दिल से जो खाते हैं | Ghazal Kasam Dil Se Jo

आप पढ़ रहे है आदरणीया अंशु विनोद गुप्ता जी की ग़ज़ल – क़सम दिल से जो खाते हैं ( Ghazal Kasam Dil Se Jo Khate Hain ) :-

ग़ज़ल – क़सम दिल से जो खाते हैं

ग़ज़ल - क़सम दिल से जो खाते हैं

सदा ही साथ रहने की क़सम दिल से जो खाते हैं
वही फिर राह में अक्सर अकेला छोड़ जाते हैं ।

सितारों तुम हो ख़ुश क़िस्मत ग़मों से दूर हो कितने
ख़ुशी की ये रिदा छोटी कहाँ हम ओढ़ पाते हैं ।

जहाँ दैरो-हरम होते वहाँ ज़ाती धर्म दिखता
जो इनसे हैं परे वे हीे दुआ में सिर उठाते हैं।

ख़िज़ाँ के उजड़े बाग़ों में कभी बुलबुल नहीं आती
गुलो-बुलबुल बहारों के लिए हम गुनगुनाते हैं।

न जाने क्या कहानी रात ने चुपके से कह डाली
कि जिसको याद करके लम्हे दिन भर मुस्कुराते हैं।

भरोसा जिनपे है हमको,भरोसा उनका कम हम पर
जिन्हें हम याद करते हैं वही हमको भुलाते हैं।

कि जिनसे वस्ल की ख़ातिर रखा ज़िंदा नफ़स को भी
सलीक़ा ‘अंशु’ मरने का वही अक्सर सिखाते हैं।

पढ़िए :- ग़ज़ल ” झूठ की ताज़ा ख़बर अख़बार है “


अंशु विनोद गुप्ता जी अंशु विनोद गुप्ता जी एक गृहणी हैं। बचपन से इन्हें लिखने का शौक है।नृत्य, संगीत चित्रकला और लेखन सहित इन्हें अनेक कलाओं में अभिरुचि है। ये हिंदी में परास्नातक हैं। ये एक जानी-मानी वरिष्ठ कवियित्री और शायरा भी हैं। इनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें “गीत पल्लवी “,दूसरी पुस्तक “गीतपल्लवी द्वितीय भाग एक” प्रमुख हैं। जिनमें इनकी लगभग 50 रचनाएँ हैं।

इतना ही नहीं ये निःस्वार्थ भावना से साहित्य की सेवा में लगी हुयी हैं। जिसके तहत ये निःशुल्क साहित्य का ज्ञान सबको बाँट रही हैं। इन्हें भारतीय साहित्य ही नहीं अपितु जापानी साहित्य का भी भरपूर ज्ञान है। जापानी विधायें हाइकु, ताँका, चोका और सेदोका में ये पारंगत हैं।

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