पेड़ पर कविता – मानता हूँ मैं | Ped Par Kavita In Hindi

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पेड़ पर कविता ( Ped Par Kavita In Hindi ) “मानता हूँ मैं” :- आज दुनिया में बढ़ते संसाधनों के फलस्वरूप प्रकृति की तरफ हमारी सजगता दिन प्रतिदिन खत्म सी होती प्रतीत होती है, प्रतिदिन न जाने करोड़ो पेड़ पूरी दुनिया में  कट रहे हैं। परिणाम स्वरूप पर्यावरण प्रदूषित हो रहा हैै। आइये पढ़ते हैं तलविंद्र कुमार जी की पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में कविता –

पेड़ पर कविता

पेड़ पर कविता - तुम मुझे खत्म किये जा रहे हो

मानता हूँ मैं, मानव ताकत है तुझमें
तभी तो, तुम मुझें ख़त्म किए जा रहे हो ।

जब होता हूँ मैं छोटा पौधा तब तो तुम
मेरा अच्छे से पालन-पोषण करते हो,
और बड़े होने पर अपने स्वार्थ के चलते
काटकर, तुम मुझें ख़त्म किए जा रहे हो ।

मेरे आग़ोश में, शेर मदहोश होकर घूमता था
मग़र आज वो ख़ुद अपने रहने का ठिकाना,
कंक्रीट से बने जंगलों में ढूंढता फिर रहा है,
फ़िर भी, तुम मुझें ख़त्म किए जा रहे हो ।

तुम मेरे फूलों से अपनी प्रेमिका को मनाते हो,
अपने घर-आँगन को मेरे फूलों से सजाते हो,
कोई भी त्योंहार बिन फुलों के नही मनाते हो,
फ़िर भी, तुम मुझें ख़त्म किए जा रहे हो ।

मैं तो अपने ज़िस्म के हिस्से को तोड़कर
तुम्हारे लिए बड़े-बड़े आशियाने बनाता हूँ,
मैं हर बेज़ान परिंदे के रहने का सहारा हूँ,
फ़िर भी, तुम मुझें ख़त्म किए जा रहे हो ।

मेरे ख़त्म हो जाने पर, चैन से नहीं जी पाओगें
रोज एक चैन भरी साँस लेने के लिए तुम
तड़पोगे भी, चिल्लाओंगे भी, रोओगे भी,
मग़र फ़िर भी, तुम मुझें ख़त्म किए जा रहे हो ।

मानव क्यूँ, तुम मुझें ख़त्म किए जा रहे हो ?
आख़िर क्यूँ, तुम मुझें ख़त्म किए जा रहे हो ?

पढ़िए :- पर्यावरण पर कविता “मूक पेड़ बोल नहीं सकते हैं”


रचनाकार पूरा नाम :- तलविंद्र कुमार
पिता का नाम :- प्रभुराम जी कड़ेला
जन्म तारीख़ :- 20/05/1998
फोन नम्बर एवं वाट्सएप नम्बर :- 9549256240
स्थायी पता :- गाँव- डेरिया, तह.- बालेसर, जिला – जोधपुर

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