प्यार में धोखा – प्यार में धोखा मिलने पर कविता | Pyar Me Dhokha Poem In Hindi

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प्यार में धोखा – प्यार में धोखा मिलने पर कविता ( Pyar Me Dhokha Poem In Hindi )

प्रिय पाठकों, मानव जीवन में प्यार की एक अहम् भूमिका है , प्यार यदि सच्चा मिलता है तो जीवन जीना बिल्कुल सरल हो जाता है। किन्तु जब उसी प्यार से धोखे की बू आने लगती है तो ह्रदय ग्लानी से भर जाता है। मन विचलित हो जाता है। समझ में नहीं आता की क्या किया जाए ताकि अपने साथी को दुबारा सही राह पर लाया जाये और जीवन की नैया को फिर से सुचारू रूप से चलाया जाये।

ऐसा ही इस कविता के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुति जिसमे प्रेमी अपनी प्रेमिका से बेहद प्यार करता है और प्रेमिका भी अपने प्रेमी से प्यार करती है। किन्तु अब प्रेमिका अपनी राह भटक चुकी है और अब किसी और की तरफ आकर्षित हो चुकी है। तो इन हालातों में प्रेमी के ह्रदय की पीड़ा आँखों में अश्रु लिए टूटे दिल के दर्द को बयाँ करती  एक कविता के माध्यम से पढ़ते हैं –

प्यार में धोखा

प्यार में धोखा

सारी रैन जगा हूँ मैं
नैनो में अश्रु लेकर।
निकल पड़ा मैं राहो पर
हाथो में चक्षु लेकर।
सारी दुनिया में मुझको बस
तेरा बिम्ब दिखाई देता है।
तेरी आँखों के मध्य मुझे
प्रतिबिम्ब दिखाई देता है।

तुम जीवन की प्रतिस्पर्धा
प्रेम मेरा ये खेल नहीं।
तुम नैनप्रिय हो सुंदरी
नैनो में दूजा मेल नहीं।
पर तुझमे कोई और मुझे
अब लिप्त दिखाई देता है।
तेरी आँखों के मध्य मुझे
प्रतिबिम्ब दिखाई देता है।

कल्पनाओं के क्षणिक सुखों
की मदुरिम सी कहानी हो।
राधा-सी रूठी हो तुम तो
विरह प्रेम दीवानी हो।
पर तेरा ये दुःख मेरा भी
अब मित्र दिखाई देता है।
तेरी आँखों के मध्य मुझे
प्रतिबिम्ब दिखाई देता है।

अधरों के चुम्बन से प्यारी
प्रेम का मिलता स्वाद नहीं।
तेरे सिवा दूजे को चाहू
दिल मेरा प्रासाद नहीं।
पर तेरे दिल में कोई और
अब व्यक्ति दिखाई देता है।
तेरी आँखों के मध्य मुझे
प्रतिबिम्ब दिखाई देता है।

प्रेम समर में अब तुम तो
मुझको मीरा जैसी लगती हो।
प्रेम बहुत तो किया मैंने
पर पीड़ा जैसी लगती हो।
पर नयन जाल में तेरा ये
प्रेमी चित्त दिखाई देता है।
तेरी आँखों के मध्य मुझे
प्रतिबिम्ब दिखाई देता है।

प्रेम की इन कड़ियों को क्यों
तू तोड़ रही है प्राण प्रिये
अपने क्षणिक सुखों की खातिर
मुझे छोड़ रही हो प्राण प्रिये
सच्चे प्रेम का इस जग में
होता कोई मोल नहीं
तेरे हृदय में मेरी खातिर अब
न कोई आलम्ब दिखाई देता है
तेरी आँखों के मध्य मुझे
प्रतिबिम्ब दिखाई देता है।

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रचनाकार का परिचय

नाम – हिमांशु प्रेमी
पता – लालगंज जिला रायबरेली ,उत्तर प्रदेश

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