वतन पर कविता – वतन से प्यार करते है | Watan Par Kavita

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अपने देश से प्यार कौन नहीं करता। सबके दिल में हिंदुस्तान के प्रति अपार श्रद्धा रहती है। कुछ लोग इसे व्यक्त कर पाते हैं और कुछ नहीं। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि उन्हें अपने देश से प्यार नहीं। अपने देश के प्रति इन्हीं भावनाओं को देशभक्ति कविता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वतन पर कविता ( Watan Par Kavita ) “वतन से प्यार करते है”

वतन पर कविता

वतन पर कविता

वतन से प्यार करते है
वतन पर खुशियाँ लुटाएंगे,
इस मिट्टी पर जन्म लिया है
मिट्टी की कीमत चुकाएंगे।

हम हिन्दू, मुस्लिम सिख इसाई
से भी आपसी भाईचारे निभाएंगे,
अपने संविधान की रक्षा खातिर
देश की जनता को जगाएंगे।

क्रान्तिकारीयों वीरों की शहादत
गाथा हम कभी न भूल पाएंगे,
आजाद भगत अशफाक गांधी
पटेल के विचार को अपनाएंगे।

नक्सली आतंकवाद खात्मा कर
पूरे हिन्दुस्तान मे तिरंगा लहराएंगे
अपनी संस्कृति की सम्मान कर
भारत को पुनः विश्व गुरु बनाएंगे

-अमित कहलगांव अंग प्रदेश

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