माता पिता का दर्द कविता :- एक तुम्हीं से आशा थी | Mata Pita Ka Dard Kavita

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माता पिता का दर्द कविता ( Mata Pita Ka Dard Kavita ) बयां कर रही है उन माता-पिता के दर्द को जिनके बेटे उन्हें छोड़ कर विदेशों में जा बसे हैं। अब उके द्वारा माँ-बाप की कोई खबर नहीं ली जा रही। कैसी है उनकी व्यथा आइये पढ़ते हैं इस कविता में :-

माता पिता का दर्द कविता

माता पिता का दर्द कविता

सारी दुनिया ने छोड़ दिया,
है तुमने भी मुख मोड़ लिया।
एक तुम्हीं से आशा थी,
पर तुमने भी दिल तोड़ दिया।

मिले तुम्हें सारी खुशियाँ,
बस इसी बात पे जोर दिया।
जब आई तुम्हारी बारी तो
हमें अपने हाल पे छोड़ दिया?

तुम चले गए, कोई बात नहीं,
पर इतना तो सोचा होता।
मैं नहीं रहा गर आज तो कल,
तेरी मम्मी का क्या होगा?

तुम सुखी रहो इसके खातिर,
वह दुआ आज भी करती है।
घूँट रही है चिंता से,
फिर भी तुम पर ही मरती है।

कितनी आसानी से पानी,
अरमानों पे तुमने फेर दिया।
सहारा जिसको देना था,
उसे राह भटकते छोड़ दिया।

जब भी मौका पाया तब,
अपनों ने दिल तोड़ दिया।
तुमसे ऐसी आस न थी,
पर तुमने भी अब वही किया।

कौन यहाँ पे अपना है,
जिसे मन की बात बताएँ हम।
जब तुम भी हुए पराए तो,
फिर किस से नेह लगाएँ हम।

पता नहीं था प्यार तुम्हारा,
भाग्य में हमरे लिखा नहीं।
मोह में इतने अंधे थे,
दस्तूरे- दुनिया दिखा नहीं।

कोई बात नहीं मेरे बच्चे
तुम सदा यूँ ही खुशहाल रहो।
हो कोई न कुछ कहने वाला,
तुम हर गम से आजाद रहो।

और नहीं अब कोई जरूरत,
तेरी हम पूरी कर सकते हैं।
अब तो खुद की खातिर भी,
हम दुनिया का मुंह तकते हैं।

इस धरती के बोझ हैं हम,
अब हमने है ये जान लिया।
जल्दी ही उठ जाएँ हम,
है ईश्वर से ये मांग लिया

अभी हमको है ये पता नहीं,
कि कैसा कदम उठाएं हम।
भगवान करें बस ऐसा हो,
कि साथ साथ ही जाएं हम।

पढ़िए :- माँ का दर्द कविता “जलती आग की लौ है माँ”


विनय कुमार (भूतपूर्व सैनिक )यह कविता हमें भेजी है विनय कुमार (भूतपूर्व सैनिक ) जी ने बैंगलोर से।

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  1. Avatar सूरज कुमार

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