26 जनवरी पर कविता :- एक शहीद की आवाज | गणतंत्र दिवस पर कविता

26 जनवरी पर कविता – भारत को स्वतंत्र करवाने में शहीदों का बहुत अहम योगदान रहा है। लेकिन क्या उनकी सोच के मुताबिक आज यह देश चल रहा है? आज देश की परिस्थिति देख कर क्या सोच रहा होगा एक शहीद। उन्हें कविता के रूप में रचनाकार ने कुछ इस ने कुछ इस प्रकार लिखा है जो आप पढेंगे इस ( Republic Day Poem In Hindi ) गणतंत्र दिवस पर कविता ( Gantantra Diwas Par Kavita ),  ( 26 January Poem In Hindi ) में :-

26 जनवरी पर कविता

26 जनवरी पर कविता

स्वराज के पथ पर कलेजों को सेका था।
उन आंखों ने भी आजाद भारत देखा था।।

मिली आजादी तो संविधान बना
लचीला आरक्षण धर्मनिपेक्ष बना
अपराध के सबक को कानून बना
जिंदगी के इंतजार का इंसाफ बना
अबूझ पहेली है कि कोई सुभाष नेता था।
उन आंखों ने भी आजाद भारत देखा था।।

संविधान में सब एक गणतंत्र है
सियासत से बलशाली जनतंत्र है
विरोधाभास के लिए सब स्वतंत्र हैं
असलियत से परे कि अब राजतंत्र है
ऐसा भारत मिलेगा कतई नहीं सोचा था।
उन आंखों ने भी आजाद भारत देखा था।।

मनाते सब संविधान का दिवस है
फैलता जुर्म और कानून विवश है
भ्रष्ट तंत्र तले हताश गरीब बेबस है
सियासी साजिशें, बढ़ती हवस है।
इस दिन के लिए लहू से परतंत्रता को भेदा था?
उन आंखों ने भी आजाद भारत देखा था।।

भारतीय हो कानून को मानना पड़ेगा
धर्म से पहले देश को जानना पड़ेगा
असहाय प्रजा का हाथ थामना पड़ेगा
नई बुलंदियों को साथ लांघना पड़ेगा
कुर्बान हुआ वो भी इसी धरती का बेटा था।
उन आंखों ने भी आजाद भारत देखा था।।

स्वराज के पथ पर कलेजों को सेका था।
उन आंखों ने भी आजाद भारत देखा था।।

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Sandeep Sindhwal

Sandeep Sindhwal

मैं संदीप सिंधवाल संजू पुत्र श्री तुंगडी सिंधवाल रौठिया रुद्रप्रयाग उत्तराखंड का निवासी हूं। मैंने हिंदी में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम. ए. किया है तथा कलनरी आर्ट फूड साइंस में बी. एस. सी. किया है। 5 साल दिल्ली के एक होटल में शेफ की नौकरी करने के पश्चात मै 5 साल से ऑस्ट्रेलिया के समीप पोर्ट मोरस्बी में कार्यरत हूं। मेरा व्यवसाय मेरे लेखन से बिल्कुल विपरीत है। विदेश में रहकर भी मैंने बहुत कविताएं लिखी हैं। मै सन 2000 से कविताएं लिखता हूं जो विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। मैट्रिक पास करने के बाद ही मेरी कविता रचना में रुचि बढ़ी। भगवान रुद्र पर कविता लिखना मेरा सौभाग्य है। विदेशों में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए भरसक प्रयास करता हूं।

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2 Responses

  1. बहुत ही बढ़िया कविता ..जय हिन्द

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