भोलेनाथ पर कविता :- भोलेनाथ का शुक्रिया | Bholenath Kavita

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भोलेनाथ पर कविता

भोलेनाथ पर कविता

है शुक्रिया भोलेनाथ तेरा,
तूने पल पल मेरा साथ दिया।
डग मग जब हुए कदम मेरे,
मुझे दोनों हाथ से थाम लिया।

सदा पास ही हो मेरे,
मुझे बार बार अहसास हुआ।
याद अभी तक है मुझको,
था गमों ने जब मुझे घेर लिया।

विश्वास उठ गया था तुम से,
दो दिन ना तेरा नाम लिया।
तब ऐसा लगा खुद आए तुम ही,
और बागडोर को थाम लिया।

नहीं मेरे वश में था कुछ भी,
तुम ने ही सारा काम किया।
कभी सोच न सकता था जितना,
प्रभु उतना तुम ने प्यार दिया।

अब तो तुम मेरे साथ ही हो,
हर पल तुम मेरे पास ही हो।

अब छोड़ के मुझको जाना मत,
यही अर्ज प्रभु मैं तुम से करूँ।
जो भी है, वही अच्छा है,
ये सोच के मैं संतुष्ट रहूँ।

विश्वास मेरा न डगमग हो,
कुछ भी चाहे लोग कहें।
बस एक ही वर प्रभु दो मुझको,
कि मांगने की ईच्छा न रहे।

ऐसे ही भला करना सबका,
भोले जैसे तू ने मेरा किया।
है शुक्रिया भोलेनाथ तेरा,
तूने पल पल मेरा साथ दिया।

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विनय कुमार (भूतपूर्व सैनिक )यह कविता हमें भेजी है विनय कुमार (भूतपूर्व सैनिक ) जी ने बैंगलोर से।

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