ईश्वर भक्ति पर कविता – आप यहां आप वहां | Ishwar Bhakti Kavita In Hindi

1+

प्रभु की महिमा का गुणगान करती हुयी ( Ishwar Bhakti Kavita In Hindi ) ईश्वर भक्ति पर कविता ” आप यहां आप वहां ” :-

ईश्वर भक्ति पर कविता

ईश्वर भक्ति पर कविता

आप यहां, आप वहां, सर्वत्र ही आप हैं।
आप ही, तो युग आत्मा का, सच्चा प्यार हैं।।

आप करुणा, सहानुभूति, सृष्टि रचना कार आप हैं।
न हृदय प्रेम, नवीन अन्य में, सृष्टि संहार ही आप हैं।।

न्यौछावर हो, ये जन्म अंक, ईष्ट का तुम पर।
प्रभु तुम्हारी लीला हर युग में अपरंपार हैं।।

अधर्म, अनीति वृद्धि हो, जब विश्व पटल पर ।
स्वयं ही विश्वधरा पर तुम, धर्म के रक्षण हार हैं।।

आप चलाये, आप रुकाएं, आप हंसाये।
आप रुलायें, आप ही, तो, तारण हार हैं।।

आप सहलाये, आप दण्डायें, आप बनाये।
आप मिटाये, आप ही धरा के सृजन हार हैं।।

आप रंगाये, आप चित्र उकेरे, आप ही तैराये।
आप ही खिवैया, आप सच में, खेवन हार हैं।।

आप ही सूक्ष्म, आप स्थूल, आप अनन्त त्रिलोकी।
आप ही त्रिकालज्ञ, आप ही घट घट, जानन हार हैं।

पढ़िए :- शिव शंकर पर कविता “सच में तुम हो  महादेव”


अंकेश धीमानयह कविता हमें भेजी है अंकेश धीमान जी ने बड़ौत रोड़ बुढ़ाना जिला मु.नगर, उत्तर प्रदेश से।

“ ईश्वर भक्ति पर कविता ” ( Ishwar Bhakti Kavita In Hindi ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

1+

Leave a Reply