पापा के लिए कविता – पापा की याद में कविता | Papa Ke Liye Kavita

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पापा के लिए कविता ( Papa Ke Liye Kavita ) – प्रिय पाठकों आज की यह कविता एक पापा की राजकुमारी जिनका नाम श्रीमती राजकुमारी रैकवार राज जी  ने भेजी है। वाकई में पापा हमारे लिए कितना कुछ कर जाते हैं किन्तु कभी हमें यह अहसास भी नहीं होने देते की वो हमारी ख्वाइशें किस तरह से पूरी करते हैं। जो मांगो सब मिल जाता है। धन्य हैं वो सब जिनके सर पर पिता की छत्रछाया है। जिनके पिता नहीं हैं उनके दर्द को महसूस कीजिये की वो कितना तड़पते होंगे। इसलिए हमेशा कोशिश कीजिये की आपकी वजह से आपके पिता को कोई तकलीफ न हो और उन्हें आप पर गर्व हो – तो आइये पढ़ते हैं पापा के लिए कविता :-

पापा के लिए कविता

पापा मेरे याद तुम्हारी बहुत है आती है।

पापा मेरे याद तुम्हारी बहुत ही आती है।
हरपल हरक्षण नहीं भूलती यादें मन बहलाती है।
आशीषों से आज आपकी सबल बनी हूँ।
जैसा कहा कियाआशीर्वाद से धनी बनी हूँ

मेरे करतब देख-देख कर जब खुश होते थे।
चोट लगी मुझे तो चुपके से खुद रोते थे ।
गोदी में उठाकर कंधे पर जब बैठा लेते थे।
मुझे सुबह ही गरम जलेबी लाकर देते थे

संघर्षों से लड़ना सिखलाया है मुझे।
साहस से आगे बढ़ना भी बतलाया है मुझे।
ब्याह रचाया चिंता रहती कैसी होगी बेटी मेरी।
पत्रों द्वारा कहते थे याद बहुत आती है बेटी तेरी।

लगता है बचपन मेंअब पहुँच गये हैं हम।
वही समय आ जाता काश साथ रहते हम।
आज नहीं हैं वो लगता है पर पास हैं मेरे।
यादों में खो जाते हैं आखों मेंआँसू भरते हैं मेरे।

फादर्स डे तो एक दिन का है पापा मेरे।
मैं एक दिन नहीं जानती आप सदैव पास हैं मेरे।
आपकी कमीं बहुत ही अनुभव करती हूँ।
जहाँ भी हो वहाँ से देखकर खुश होंगें कि संघर्ष से नहीं मैं डरती हूँ।

पापा मेरे याद बहुत तुम्हारी आती है।
हरक्षण नहीं भूलती यादें मन बहलाती है।
अब मैं बार बार नमन करती हूँ।
आपकी हर इक याद को मन में सिमटे रखती हूँ
पापा मेरे याद बहुत तुम्हारी आती है।

नमन करती हूँ ।
आपकी बेटी

पढ़िए :- पिता पर कविता “बेटी का बाप हूँ”


रचनाकार परिचय –
नाम-श्री मति राजकुमारी रैकवार
साहित्यिक नाम- राजकुमारी रैकवार राज
माता पिता का नाम-
स्वर्गीय -श्री खुन्निलाल रैकवार
स्व-श्री मती कस्तूरी बाई रैकवार
पति का नाम -श्री ऋषिकुमार रैकवार
आयु– 63 वर्ष
निवास– जबलपुर म, प्र ।
विधा– काव्य लेख कविताएं दोहा गीत गजल,लघुकथा आदि।

प्रकाशन—-मेरी कविताएँ,लेख,लघुकथा, दैनिक भास्कर नव भारत न्यूज पेपर में छपी है ।और अभी तक कर्म कसौटी अखबार में आ रही हैं ।लखनऊ के हिन्दी प्रचार-प्रसार में भी आ रही हैं । ये द्वयमासिक पत्रिका है ।
सम्मान- गूँज संस्था से गूँज गौरव सम्मान मिला।
विश्व साहित्य नारी कोष से- कलम की सुगंध सम्मान मिला।
प्रसंग संस्था से- लघुकथा सम्मान ।
साहित्य संगम संस्थान से- साहित्य ज्योति सम्मान ।
सब से बड़ी उपलब्धि-सीनियर सिटी जन क्लब से पहली बार बेस्ट कपल आफ़ दा इयर सम्मान ।
मै गीत गजल बगैरा भी गाती हूँ तथा बुन्देली लोकगीत पंजाबी गीत एवंभोजपुरी गीत का भी शौक है

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