मतदान पर कविता – अंकगणित और बीजगणित हमें जीवन के सूत्र समझाते हैं—जोड़, घटाना, गुणा और भाग के माध्यम से हम संख्याओं के उत्तर खोज लेते हैं। परंतु जीवन की गणित केवल संख्याओं तक सीमित नहीं होती। इसमें निर्णय, चयन, त्याग, राष्ट्रप्रेम और कर्तव्य जैसे अनेक जटिल समीकरण होते हैं, जिनका समाधान केवल बुद्धि से नहीं, बल्कि विवेक और चेतना से होता है।
प्रस्तुत कविता जीवन की इसी गणित को राष्ट्रहित और नागरिक कर्तव्य के संदर्भ में समझाने का एक सार्थक प्रयास है। इसमें धारा के रूपक के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि हर व्यक्ति को अपना मार्ग चुनना होता है—सुविधा का या संघर्ष का, स्वार्थ का या राष्ट्रहित का।
यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक के लिए संदेश है कि वह अपने मताधिकार का उपयोग सोच-समझकर करे और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपना योगदान दे।
मतदान पर कविता

अंकगणित के खेल में आके जोड़ घटाने को समझाऊं
सूत्र समझकर बीजगणित के समीकरण को सिद्ध कराऊं
जोड़ घटाना गुणा भाग से कई आकलन कर सकते हैं,
मान के A को B से, B को C से उत्तर गढ़ सकते हैं
परन्तु क्या जीवन की गणित के हर प्रश्नों के चिन्ह मिटेंगे
अपनी अपनी रेखा वाले क्या रेखा से तनिक हटेंगे
या कोई zig zag बनाकर जनमानस को उलझा देवे,
या कोई समरसता वाले बिंदू को ही समझा देवे
मुझे पता है धाराएं जब पत्थर से टकराती हैं
उचित या अनुचित वेग में बहकर दो धारा हो जाती है
धारा एक जो अवरोधों में खोकर के अस्तित्व गंवाए
और दूसरी धारा वह जो अवरोधों को भी खा जाए
धारा एक जो चुने भोग को या सुविधाओं की छाया
और दूसरी धारा चुन ले त्याग तपस्या की काया
धाराएं जो चाहो चुन लो जैसा भी हो चयन आपका
राष्ट्र प्रेम है चयन हमारा सोचो क्या है चयन आपका
विषय चयन का है तो आओ सही चयन पे चर्चा कर लें
दौर चुनावों का है मित्रों मु्द्दे लिख लिख पर्चा भर लें
मुद्दों की ताशीर समझ लें क्या कितना आवश्यक है
कौन सा मुद्दा क्षणभंगुर है कौन सा मुद्दा शाश्वत है
*पूरा भारत खुशी मनाएं जन जन तक अभियान करो*
बूथ पे जाके राष्ट्र हितैषी मुद्दों पर मतदान करो
महंगाई है, सही बात है, मंहगा है सामान सभी|
मॉल और शोरूम के कारण होते बन्द दुकान सभी
रोजगार का पूछो ही मत युवा भी तो बेरोजगार है
जीवन कैसे चलेगा भइया भ्रष्टाचार की बहुत मार है
पिछड़ा दलित गरीब पे कोई ध्यान नहीं है शासन का
कहो भला क्या लाभ है ऐसे पांच किलो भर राशन का
इधर किसानों को भी देखो नफा नही नुकसान बहुत है
मूल्य समर्थन ना मिलने से खेतिहर भी परेशान बहुत है
महिलाओं का उत्पीड़न है, शिक्षा को बेकार किया है
जाने कैसा जन सेवक यह जुमलों का विस्तार किया है
बहुत सही यह मुद्दे भइया विपक्ष की हर बात सही है
सत्ता वाले सत्य बोल दें यह उनकी औकात नही है
*इन मुद्दों पर करे काम जो उस नेता पर ध्यान धरो*
बूथ पे जाके राष्ट्र हितैषी मुद्दों पर मतदान करो
और अन्य जो भी मुद्दे हैं आओ उनपे बात करें
बात करें की प्रगतिशीलता में हम किसका साथ धरें
देश सुरक्षा सरहद पर हो फौज सख्त मुस्तैद रहे
आतंकों पर त्वरित फैसला स्वाभिमान ना कैद रहे
कैद रहे ना मातृभूमि का अंश मात्र भी अंग कहीं
और अंतरिक शांति सुरक्षा नहीं हो सके भंग कहीं
भारतवासी चोटिल ना हों घुसपैठों की चोटों से
दहले ना बंगलौर मुंबई दिल्ली बम विस्फोटों से
लंबित मुद्दे भारत भर में जो विवाद के कारण थे
सोचो अब तक उन मुद्दों पर किसने किए निवारण थे
किसने भारत माता के जख्मों पर मरहम पट्टी की
किसने जम्मू काश्मीर में देश प्रेम की घुट्टी दी
किसने सोचो धर्म सनातन के अनुकूल विचार किए
किसने सोचो वंदे मातरम जीवन को आधार दिए
किसने सारे भोग त्यागकर उपवासों को पाला है
किसने भारत माता के गौरव को खूब सम्हाला है
किसने अपनी जड़ों से जुड़कर योग दिवस पर ध्यान दिया
किसने अपने अखंड भारत पर अब तक अभिमान किया
*राष्ट्र भावना के मन्दिर के निर्माणों का ध्यान करो*
बूथ पे जाके राष्ट्र हितैषी मुद्दों पर मतदान करो
किसने विश्व पटल पर भारत के पुत्रों का साथ दिया
किसने शत्रु की आंखों में आंख डालकर बात किया
किसने संकट में युद्धों से अपनों को वापस लाए
झंडे थामकर भारत के पाकिस्तानी भी बच पाए
हैं अंक गणित की पिछले पचपन वर्षों में हम क्या पाए
है बीजगणित की स्वाभिमान के मूल्य कोई लौटा जाए
जो क्रांतिवीर कुछ लाभ हानि के बिना देश पे प्राण दिए
फोकट के लोभ लुभावन के समझौतों पे ना ध्यान दिए
तो सोचो और विचार करो क्या खोकर क्या पा सकते हो
क्या पाकर क्या खो सकते हो जो कभी नही पा सकते हो
कुछ इतिहासों से सीख सको तो गलती मत दुहराओ तुम
त्यागो स्वार्थ्य भावना अपनी पौरुष पुंज जगाओ तुम
गर्व कर सको भारत पे ऐसा भारत बन जाने दो
दानवता की बेल विषैली काट छांट जल जाने दो
छोड़ याचना करो साधना नौकर ना मालिक बनिए
धर्म भाव से प्रगतिशील बन कर्मवीरता को चुनिए
*पंचवार्षिक युद्धों में जाओ जाके योगदान करो*
बूथ पे जाके राष्ट्र हितैषी मुद्दों पर मतदान करो
पढ़िए :- जात पात पर कविता – जात पात से दूर | Jaat Paat Par Kavita
रचनाकार का परिचय

नाम – जितेंद्र कुमार यादव
धाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश
स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई
शिक्षा – स्नातक
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