किसान का दर्द कविता – एक किसान कल | Poem On Farmer

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प्रिय पाठकों, आज ब्लॉग पर आपके लिए प्रस्तुत है – किसान का दर्द कविता ( Poem On Farmer In Hindi ), किसान हमारे देश की जान हैं। लेकिन उनके दर्द को समझने वाले शायद ही यहाँ कोई हो। हर वर्ष कितने किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कभी प्राकृतिक आपदा से तो कभी जंगली जानवर उनकी फसलों को नुकसान पहुंचा देते हैं और बेचारे किसानों के पास अपनी आजीविका चलाने के लिए और कोई साधन भी नहीं हैं।

ऐसे में देश की सरकार को किसानों के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए जिससे उनका अस्तित्व बना रहे। अब देखिये न कितनी बड़ी बिडम्बना है हमारे देश की, खाने को सभी को चाहिए लेकिन उगाना नहीं चाहता और जो उगा रहा है उसे पूछने वाला भी कोई नहीं है। आइये कवि अनमोल रतन जी के शब्दों में पढ़ते हैं किसान के दर्द को बयाँ करती उनकी कविता –

किसान का दर्द कविता

किसान का दर्द कविता

रो रो के कह रहा था एक किसान कल।
कुछ सांड आ के चर गये हैं मेरी फसल।।

घर में हैं भूखे बच्चे
भोजन कहाँ से लाऊँ
जो कर्ज ले लिया था
उसे कैसे अब चुकाऊँ
इस साल घर में शादी बेटी बड़ी खुश थी,
पर अरमानो की चितायें सब गयी हैं जल
रो रो के कह……………………….।।1

आखों में हैं आसू
पर ये गिर नही रहे
सूखा पड़ा हैं बादल
कियूँ घिर नही रहे
क्या करें सरकारे और क्या करे ये लोग,
जब कर रही किस्मत किस्मतो से छल
रो रो के कह ………………………..।।2

खुश हाल ज़िन्दगी की
सब खुशियाँ गयी छिन
बैठे रहते किसान अब
इन खेतो में रात दिन
खेती करना हो रहा दिन पे दिन ज़ठिल,
देखो ज़रा समय गया किस तरह बदल
रो रो के कह……………………..।।3

बे हाल हैं किसान
ज़रा हाल पूछ लो
कितना हुआ गल्ला
इस साल पूछ लो
अब रोशनी कही से रतन आ नही रही,
लगता हैं उम्मीद का सूरज गया हैं ढ़ल
रो रो के कह……………………..।।4

रो रो के कह रहा था एक किसान कल।
कुछ सांड आ के चर गये हैं मेरी फसल।।

पढ़िए :- छोटी कविता किसान पर “किसान की व्यथा को”


रचनाकार का परिचय –

कवि अनमोल रतननाम- अनमोल रतन (श्रृंगार रस कवि)
पता – रायबरेली, उत्तर प्रदेश

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