प्यार में धोखा कविता -शूलों से है प्यार मुझे

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प्रिय पाठकों, आज की कविता प्यार में धोखा मिलने पर है, जीवन में कभी न कभी हम सभी को किसी न किसी से प्यार होता है जिसमें कि किसी को उनका प्यार नसीब होता है तो किसी को बस विरह मिलती है , यह जीवन का सबसे दुखद क्षण होता है. भगवान् किसी के भी साथ ऐसा अन्याय न करे और हाँ कोई किसी को धोखा न दे .क्यूंकि चोट के घाव तो भर जाते हैं किन्तु धोखे और वेवफाई के घाव पूरे जीवन साथ रहते हैं… इसलिए अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो उनका साथ हर कदम पर निभाएं …… तो आइये पढ़ते हैं कालिका प्रसाद सेमवाल जी की कविता –

प्यार में धोखा कविता -शूलों से है प्यार मुझे

 

प्यार में धोखा कविता

इस जग में आज मेरा
अगर प्रिय होता कोई!
पग में छाले दर्द उभरता
आँसू से भर धोता कोई।

मैंने प्यार किया जीवन में
जीवन ही अब भार मुझे,
रख दूं पैर कहां संगिनी,
मिल जाए आधार मुझे।

दुनिया की यह दुनियादारी,
करती है लाचार मुझे।
भाव भरे उर से चल पड़ता,
मिलता क्या उपहार मुझे।

स्वप्न किसी के आज़ उजाडूँ
इसका क्या अधिकार मुझे।
मरना जीना ही जीवन है,
फिर छलता क्यों संसार मुझे।

विरह विकल जब होता मन ,
सेज सजाकर सोताकोई।।
फूलों से है उलझन लगती,
शूलों से है अब प्यार मुझे।

देख चुका हूँ शीतलता को,
प्रिय लगता अंगार मुझे।
दुःख के शैल उमड़ते आयें
सुख की नहीं परवाह मुझे।

भीषण हाहाकार मचे जो
आ न सकेगी आह मुझे।
नहीं हितैषी कोई जग में,
यहीं मिली है हार मुझे।

ढूँढ चुका हूँ जी का कोना,
किन्तु मिला क्या प्यार मुझे।

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रचनाकार परिचय  –

नाम—कालिका प्रसाद सेमवाल
पिता का नाम—श्री गिरिजा शंकर सेमवाल
माता का नाम—श्रीमती कल्पेश्वरी देवी सेमवाल
शिक्षा—एम०ए०, भूगोल, शिक्षा शास्त्र
आपदा प्रबंधन,
व्यक्तित्व विकास फाउंडेशन कोर्स विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बी०एड० सम्प्रति व्याख्यात
सेवारत —जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा रूद्रप्रयाग उत्तराखंड
प्रकाशित पुस्तकें–रूद्रप्रयाग दर्शन
अमर उजाला,दैनिक जागरण ,हिंदुस्तान व पंजाब केसरी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में धर्म संस्कृति व सम सामयिक लेख प्रकाशित होते हैं ,उत्तराखंड विघालयी शिक्षा की हमारे आसपास,कक्षा 3,4,5, और कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक लेखन समिति के सदस्य के लेखक भी हूँ .
अब तक प्राप्त सम्मान—
रेड एण्ड व्हाईट पुरस्कार
हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्यभूषण, साहित्य मनीषी,अन्य मानस श्री कालिदास सम्मान,उत्तराखंड गौरव साहित्य मण्डल, श्रीनाथ द्वारा साहित्य रत्न, साहित्य महोपाध्याय

सम्मानोपधि
देश की विभिन्न संगठनों द्वारा साहित्य में पचास से अधिक सम्मान मिल चुके है
पता—मानस सदन अपर बाजार
रूद्रप्रयाग उत्तराखंड
पिनकोड 246171


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