“यादों का ज़हर” वफ़ा, बेवफाई और रूहानी दर्द की एक ऐसी दास्तां है, जो सीधे दिल पर दस्तक देती है। यह कविता उन प्रेमियों की आवाज़ है जिन्होंने मोहब्बत में सिर्फ आँसू और तन्हाई को ही अपना इनाम पाया है। जहाँ एक ओर कवि खुद को मिटाकर शांति (सुकून) पा लेने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर वह पीछे छूट गए शख्स के लिए यादों को एक कभी न खत्म होने वाली ‘सज़ा’ के रूप में देखता है। यह रचना Sad Hindi Poem Shayari और Emotional Poetry के चाहने वालों के लिए एक आईना है, जो यह बताती है कि कभी-कभी किसी की खामोशी और गैर-मौजूदगी, शब्दों से कहीं ज्यादा शोर करती है।

Sad Hindi Poetry Image | यादों का ज़हर | Sad Hindi Poem on Memories
वफ़ा की दुनिया में… मिला बस यही इनाम,
आँखों में आँसू… और होठों पर तेरा नाम।

मौत आएगी मुझे इक सुकून बनकर,
मिट जाएँगे सब शिकवे खाक में मिलकर।

पर तुम्हें तो कतरा-कतरा, पल-पल मरना होगा,
जिंदा रहकर ही यादों का ज़हर पीना होगा।

वफ़ा की दुनिया में… मिला बस यही इनाम,
आँखों में आँसू… और होठों पर तेरा नाम।

न कोई मज़ार होगी मेरी, न कोई निशान होगा,
मिटा दूँगा खुद को ऐसा, कि बस धुआँ-धुआँ होगा।

जहाँ कभी हम मिले थे, वो हरसूँ वीरान होगा,
बस मेरी तन्हाइयों का ही एक जहान होगा।

वफ़ा की दुनिया में… मिला बस यही इनाम,
आँखों में आँसू… और होठों पर तेरा नाम।

हम तो आज़ाद हो जाएँगे राख होकर हवाओं में,
खो जाएँगे खामोशी में, टूटे से ख़्वाबों में।

पर तुम उम्र भर कैद रहोगे यादों के खौफ में,
हर सांस सज़ा बनेगी, टूटे हर एक ख्वाब में।

वही यादें… जो तुम्हें सोने न देंगी,
वही यादें… जो तुम्हें रोने न देंगी।

मेरी खामोशी तुमसे हर रोज़ सवाल करेगी,
मेरी गैरमौजूदगी भी तुमसे बात करेगी।

वफ़ा की दुनिया में… मिला बस यही इनाम,
आँखों में आँसू… और होठों पर तेरा नाम।

हमें यकीन है कि इस कविता के शब्द आपकी रूह तक पहुँचे होंगे। क्या आपने भी कभी महसूस किया है कि किसी की यादें मरहम बनने के बजाय ज़हर बन जाती हैं? या क्या आपको लगता है कि खामोशी वाकई शब्दों से ज्यादा सवाल करती है? इस कविता की कौन सी पंक्ति आपके दिल के सबसे करीब रही, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आपके विचार और अनुभव इस कविता को और भी जीवंत बनाएंगे।


रचनाकार का परिचय

बाल कृष्ण मिश्रा

यह कविता हमें भेजी है बाल कृष्ण मिश्रा जी ने फ़्लैट नंबर 253, भूतल, श्री कृष्ण अपार्टमेंट, जे-2, सेक्टर 16, रोहिणी, नई दिल्ली से।

यादों का ज़हर | Sad Hindi Poem on Memories ” आपको कैसी लगी ? “ यादों पर इस दर्द भरी कविता के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

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