बसंत ऋतु पर कविता :- देखो आ गयी बसंत | Basant Ritu Kavita In Hindi

आप पढ़ रहे हैं रेणु शर्मा जी द्वारा रचित बसंत ऋतु पर कविता ( Basant Ritu Kavita In Hindi ) “देखो आ गयी बसंत”

बसंत ऋतु पर कविता

बसंत ऋतु पर कविता

दुख का होता अंत ,,
देखो आ गयी बसंत ।।
खिल रहे है फूल बागान ,,
करती नदिया कलकल।।

चहुँओर किलकारियाँ ,
कोयल मधुर संगीत सुना रही।।
सुहाना मौसम लेता अंगड़ाई ,,,
अब जीवन में बहार है आयी।।

होता सवेरा खिल उठे लोग,,,
उम्मीद जाग रही लोगों के मन,,
देती प्रेरणा बसंत हमें,,
मिलजुल के सब कर्म करो।।

पीत ओढ़े है खेत खलिहान ,,
कमल खिल छिप रहा जल ,
देता संकेत हो रहा दुखो का अंत ।।

शोर कर रहै पशु पक्षी ,,,
दे रहे है संकेत ,,
अंत हो रहा है पतझड़ का ।।

आने वाले रंग है अब,,
घर आँगन में बहारे आयी,,
खुशियों की सौगात आयी।।

तन मन सब खिल रहे ,,
दिख रही हरियाली ,,
धरा धारण कर सोने सा रूप,,
अब जीवन में बहार आयी।
बसंत अब लोट आयी।।

पढ़िए :- वसंत ऋतू पर कविता “मेरे प्रिय बसंत”


रेणु शर्मायह कविता हमें भेजी है रेणु शर्मा  जी ने राजस्थान से।

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