बेटी पर कविता :- हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ

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बेटियों से ही घर की रौनक होती है। बेटियां ही घर की शान होती हैं। रिश्तों को जन्म देने वाली बेटियां बहुत ही महान होती हैं। आइये पढ़ते हैं उन्हीं बेटियों को समर्पित यह बेटी पर कविता ” हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ ”

बेटी पर कविता

बेटी पर कविता

गंगा की निर्मल नीर सी होती है बेटियाँ।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ ।

मंदिर की घंटियां है कुरान है कुरान है मस्जिद की।
गुरुद्वारे की गुरूवाणी होती है बेटियाँ ।।

गीता के श्लोक रामायण की चौपाइयाँ।
कबीर की दोहे सी होती बेटियाँ ।।

बेटियाँ नहीं तो सूना सारा जहाँ
माँ बहन राखियाँ सी होती है बेटियाँ ।।

राम कृष्ण गौतम बेटियों की देन है
सृजन की देवी नारी होती है बेटियाँ ।।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ ।

बेटी तुलसी की बिरवा फूलों की महक है।
जूही चम्पा चमेली होती है बेटियाँ।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ ।

सीता सावित्री से समझो न इसे कम।
दोंनो कुल की तारणी होती है बेटियाँ ।।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ ।

राखी तीज करवा चौथ रस्म बेंटियों से है।
माथे की चंदन अबीर सी होती है बेटियाँ ।।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ ।

रौशन करेगा बेटा बस एक ही कुल को।
दोनों कुलों के दर्द को सहती है बेटियाँ ।।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ ।

सानिया किरण वेदी चाहे कल्पना कहो।
आसमां को छू रही आजकल की बेटियाँ ।।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ ।

आँगन में कन्यादान होता है जिस घड़ी।
माँ बाबुल की आँख भिगोती है बेटियाँ ।।

पायल की रूनझुन से गूँजे देखो अँगना।
आँगन की लक्ष्मी सरस्वती होती है बेटियाँ ।।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ।

गंगा की निर्मल नीर सी होती है बेटियाँ ।
हम सबकी तकदीर सी होती है बेटियाँ।।

पढ़िए :- बेटी की विदाई पर कविता “उठी डोली चली ससुराल”


रचनाकार का परिचय :-

श्रीमती केवरा यदु " मीरा "यह कविता हमें भेजी है श्रीमती केवरा यदु ” मीरा “ जी ने। जो राजिम (छतीसगढ़) जिला गरियाबंद की रहने वाली हैं। उनकी कुछ प्रकाशित पुस्तकें इस तरह हैं :-
1- 1997 राजीवलोचन भजनांजली
2- 2015 में सुन ले जिया के मोर बात ।
3-2016 देवी गीत भाग 1
4- 2016 देवीगीत भाग 2
5 – 2016 शक्ति चालीसा
6-2016 होली गीत
7-2017 साझा संकलन आपकी ही परछाई।2017
8- 2018 साझा संकलन ( नई उड़ान )

इसके अतिरिक्त इनकी अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित हो चुकी हैं। इन्हें इनकी रचनाओं के लिए लगभग 50 बार सम्मानित किया जा चुका है। इन्हें वूमन आवाज का सम्मान भी भोपाल से मिल चुका है।
लेखन विधा – गीत, गजल, भजन, सायली- दोहा, छंद, हाइकु पिरामिड-विधा।
उल्लेखनीय- समाज सेवा बेटियों को प्रशिक्षित करना बचाव हेतु । महिलाओं को न्याय दिलाने हेतु मदद गरीबों की सेवा।

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