प्रेम पत्र कविता :- पहला खत | Prem Patra Kavita

आप पढ़ रहे हैं ( Prem Patra Kavita ) प्रेम पत्र कविता “पहला खत” :-

प्रेम पत्र कविता

प्रेम पत्र कविता

प्रेम पत्र के इंतजार में,
पहला खत लिखा था।
कुल दो पंक्तियाँ लिखी उसने,
हमने दो सौ बार पढ़ा था।
दो दिन भी रखने ना दिया पास,
दूसरा खत लिखने का वादा कर
पहला फड़वा दिया था।

क्या ऐसा होता है लव लेटर,
उसने कहा सुनो मेरी डिअर,
मैं शायर नहीं कि लिख भेजूँ शायरी या गजल,
पन्नों को न देख डाल शब्दों पर नजर।

दो पंक्ति के जवाब तीन शब्द में दे देना,
फिर कागज का क्या काम,
ये काम फ़ोन को सौंप देना
ना लिख सको तो कोई बात नही,
इशारों से हमको बता देना।

बस वही था उनका और मेरा
पहला और अंतिम खत,
कभी याद सताए तो लिखकर
फाड़ देने पर हुए दोनों सहमत,
पहले खत की पहली पंक्ति की
अब एहमियत न रही,
दूसरी पंक्ति का विश्वास
ले गयी हमारी किस्मत।

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धन्यवाद।

Sarika Agrawal

Sarika Agrawal

यह रचना है सारिका अग्रवाल जी की जो कि बिरतामोड, नेपाल में रहती हैं।

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