भगवत गीता पर भक्ति कविता – मौत दबे पाँव सी मेरे कमरे में आई

संसार में इंसान किसी चीज से बहुत ज्यादा डरता है तो वो है मौत। लेकिन एक शक्ति ऐसी है जो हमारे सारे डर ख़तम कर देती है। वो है भगवत गीता की शक्ति। यह एक ऐसी शक्ति है जो हमारे जीवन को सरल और सुगम बना देती है। हमारी सारी चिंताएं समाप्त कर देती है। उसी भगवत गीता की महिमा बता रही है यह भगवत गीता पर भक्ति कविता :-

भगवत गीता पर भक्ति कविता

भगवत गीता पर भक्ति कविता

मौत दबे पाँव सी मेरे कमरे में आई।
मैं उस वक्त गीता पढ़ रही थी भाई।।

मेरा ध्यान भी न गया बिल्कुल उस और।
खुद ही बुदबुदाई देख कर मेरी और।।

यमराज हूँ आज्ञा पाकर लेने आया।
मेरी तरफ से जवाब जब नदारद पाया।।

उनके भी धैर्य का ईमान डगमगाया।
बोले तुम्हें डर नहीं लगता है मौत से।।

मैंने कहा दफा हो मुझे न डराओ खौफ से।
भगवत पढ़ रही हूँ एकदम सच्चे मन से।।

शिकायत कर दूँगी तुम्हारी माँ कसम से।
भक्ति में खामख्वाह खलल डालती हो।।

मैं पूजा में बिजी हूँ क्यूँ सालती हो।
यदि पूजा मे मेरी डालोगी व्यवधान।।

करुण पुकार सुनकर ईश्वर देंगे ध्यान।
चली जा यहाँ से आज कहना मेरा मान।।

सचमुच सहम गई बेचारी.. डर के मारे।
चुपचाप खिसक गई जाने किस के द्वारे।।

सचमुच मुझे अभिमान हो गया गीता पर।
सच्ची बात कह रही विश्वास करो रीता..पर।।

✍🏼 *रीता जयहिन्द हाथरसी ( दिल्ली )*

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परिचय- नाम-रीता अरोडा
उपनाम-“जयहिन्द हाथरसी”
पता- रीता अरोडा़। 3941 फर्स्ट फ्लोर थाना स्ट्रीट रोशनारा रोड , ओल्ड सब्जी मंडी , दिल्ली -7
विधा-हास्यरस व ओजरस प्रमुख सम-सामयिक सभी गद्य व पद्य।
ईमेल -आई डी ritaarora224@gmail.com


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