गुरु महिमा पर कविता | Guru Mahima Par Kavita

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गुरु महिमा पर कविता – दोस्तों जब  भी कोई व्यक्ति इस दुनियां में जन्म लेता है तो उसे उसके पश्चात भाँती -भाँती के व्यक्तियों का मार्गदर्शन मिलता रहता है,व्यक्ति की प्रथम पाठशाला उसका घर होता है और प्रथम गुरु माँ होती है,जो उसे अपने वात्सल्य की छावं में ममता की चादर में पालती है किन्तु आज हम बात कर रहे हैं उस गुरु की जो हमें माता-पिता के बाद मिलता है और हमें इस दुनिया में पुस्तक ज्ञान के माध्यम से दुनिया के साथ हर सफर में कदम से कदम मिलाकर चलने की सीख देता है, तो आइये गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पढ़ते हैं मेरी कविता ( Poem On Guru Ki Mahima ) गुरु महिमा पर कविता – गुरु से ही हमारी शान है :-

गुरु महिमा पर कविता

गुरु महिमा पर कविता

गुरु हमारे तमस मिटाये।
जीवन से अंधकार हटाये।
शिक्षा का सूत्र देकर हमारे
जीवन से अहंकार भगाये।
दुर्गुणों को दूर कर फिर
देता गुणों की खान है
गुरु से ही हमारी शान है

गुरु हमारा आकाश है।
देता राहों में प्रकाश है।
बिन गुरु यह जीवन तो
जैसे इक जिंदा लाश है।
पुस्तकों को पढ़ाकर हमें
रखता हमारा मान है।
गुरु से ही हमारी शान है।

शिक्षा जीवन का अर्थ है।
उसके बिन जीना व्यर्थ है।
गुरु का साथ पाने से ही
हमारा जीना समर्थ है।
भोजन की तरह शिक्षा भी
होती जीवन की जान है।
गुरु से ही हमारी शान है।

गुरु सफलता की आश है।
असफलता होती हताश है।
मिला न गुरु जिसको कभी
वह होता जीवनभर निराश है।
आध्यात्म की शिक्षा देकर
गुरु सिखाता हमें ध्यान है।
गुरु से ही हमारी शान है।

गुरु ही जीवन का सार है
सफलता का भी प्रसार है।
सदव्यहवार देता है हमें जो
इस जीवन का आधार है।
इस पावन धरा पर हमें
शिक्षा से मिलता सम्मान है।
गुरु से ही हमारी शान है।

गुरु जीवन की ज्योति है।
अशिक्षा हमारी खोती है।
गुरु का महत्व जीवन में
जैसे अनमोल मोती है।
गुरु से ही मिलती है हमें
इक अनोखी पहचान है।
गुरु से ही हमारी शान है।

गुरु बिना यह जीवन सूना।
उसके बिना न आये जीना।
गुरु ही इस संसार मे होता
बेशकीमती कोई नगीना।
संसार के समस्त जनों में
गुरु होता सबसे महान है।
गुरु से ही हमारी शान है।

हरीश चमोली

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हरीश चमोली

मेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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