हिंदी दिवस पर कविता :- ओ मेरी मातृभाषा

14 सितंबर को मनाये जाने वाले हिंदी दिवस को समर्पित ( Hindi Diwas Par Kavita ) हिंदी दिवस पर कविता :-

हिंदी दिवस पर कविता

हिंदी दिवस पर कविता

ओ मेरी मातृभाषा
तुझसे मेरी पहचान है।
तू मेरी शान है।
जननी तू मेरी
मेरा अभिमान है।

अ से शुरू कर
ज्ञ तक ले जाती है।
ज्ञान का भंडार
जीवन में भर जाती है।
पाश्चात्य संस्कृति घेरे है, तुझको।

तू तो माँ है, मेरी
हर बला को दूर कर देगी।
अपने सीने से लगा कर रखती हो,
अंधकार को दूर करती हो,
हिंदी हमारी मातृभाषा है।
इसकी पहचान तुम बारंबार करवाती हो।
हर भाषा की जननी हो
मातृभाषा की पहचान हो।

तेरा कोई मोल नहीं
तू स्वयं में अनमोल है।
तुझ बिन मैं अधूरी
ये कलम भी रुकी है।
हर रोज मेरी शीश
तेरे चरणों पे झुकी है।
तूने बढ़ाया हमारा ज्ञान
तुझसे ही है, हम सबका सम्मान।

पढ़िए :- हिंदी भाषा के महत्व पर कविता “हिंदी को ही भूल गया है”


रचनाकार का परिचय

ट्विंकल वर्मा

यह कविता हमें भेजी है ट्विंकल वर्मा जी ने आसनसोल, पश्चिम बंगाल से।

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1 thought on “हिंदी दिवस पर कविता :- ओ मेरी मातृभाषा”

  1. श्याम बिल्दानी 'सादगी' बड़नेरा अमराती ((महाराष्ट्र))

    बहुत शुभकामनाएं आपकी सुंदर प्रस्तुति के लिये।

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