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हिंदी कविता दिल की आरजू

हिंदी कविता दिल की आरजू

तेरे नाम की खुशबू संग मन मदहोश हुआ जाता है ।
बेचैन दिल तेज धड़कन तेरी भीनी यादों में रहना मन को बहुत तड़पाता है ।

पहचान न होती तो अनजाना बना लेते
अपना न सही बेगाना बना लेते ।

एक बुत तलाश लेते ख़्वाबों में ,
साथ लेकर दिल के जहां में कोई बुतखाना बना लेते ।

मौसम भर ये गुलशन न ठहरा ,
ख़्वाबों के अंजुमन को वीराना बना लेते ।

गर उल्फत की शमा जलाते तो बेदर्द
जिगर को अपना परवाना बना लेते ।

छलका नजर से जाम नजर फेरी ,
खुद को वफा का मस्ताना बना लेते ।

निशाने तीर जिगर में
खामोशियों का महखाना बना लेते ।

चाहते बेहतर चाहतों का एक पैमाना बना लेते ।
पहचान न होती तो अनजाना बना लेते ।


रचनाकार कर परिचय :-

अवस्थी कल्पनानाम – अवस्थी कल्पना
पता – इंद्रलोक हाइड्रिल कॉलोनी , कृष्णा नगर , लखनऊ
शिक्षा – एम. ए . बीएड . एम. एड

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This Post Has 2 Comments

  1. Avatar
    हरिकृष्ण शुक्ल

    गजब दीदी जी

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