कोरोना पर हिंदी कविता – विनाशकारी है बड़ा ही करोना

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कोरोना पर हिंदी कविता

कोरोना पर हिंदी कविता

इसे ख़त्म करने के लिए लाज़मी है सबका आगे होना ,
ये कांटेदार गोला विनाशकारी है बड़ा ही करोना।

दिमाग़ , फेफ़ड़े और दिल है इसका असली निशाना ,
बहुत असर करेगा इस पर हाथों को बार – बार धोना।

आया चीन से मेहमान बनकर कई देशों – विदेशों में ,
लोगों की हसी को खा गया इसका घर – घर जा रोना।

जो बली ले गया उनकी उनके अपनों के ही सामने ,
समझते जो थे चमगादड़ों ,सांपों को मिटटी का खिलौना।

वो खाते थे शौंक से दिल , गुर्दे निकाल – निकालकर ,
करोना ने लगा दिया उन सबका शमशान में बिछौना।

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यशु जानयशु जान (9 फरवरी 1994-) एक पंजाबी कवि और लेखक हैं। वे जालंधर सिटी से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं । उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीत, कविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं। वे अपनी उपलब्धियों को अपनी पत्नी श्रीमती मृदुला के प्रमुख योगदान के रूप में स्वीकार करते हैं।

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