क़ातिल शायर यशु जान की दिल चीरने वाली शायरी

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क़ातिल शायर यशु जान की शायरी

क़ातिल शायर यशु जान

‘मुझे किसी बात का ख़ौफ़ नहीं,
हमें आयेगी मोहब्बत मौत नहीं,
ज़िन्दा हूँ हसीन चेहरों की बदौलत,
इश्क़ मेरी इबादत है मेरा शौक़ नहीं’

मुझे ही नहीं मेरे दोस्त सबको दिक़्क़त आजकल हो रही है ,
तुम नौक़री की बात करते हो यहाँ ज़िन्दग़ी बचानी मुश्क़िल हो रही है

इश्क़ का क़ानून ख़तरनाक़ है ख़ुदा से भी ऊपर है ,
उन्होंने क़त्ल भी मेरा किया इल्ज़ाम भी मेरे ऊपर है

हम दोनों के एक जैसे ही कर्म हैं,
तुम भी बे – शर्म हो हम भी बे – शर्म हैं

जब मेरा मेरे दिल का क़त्ल किया जाये
रहम किया जाये आख़िरी ख़्वाहिश को भी पूछ लिया जाये

ख़ुदा की कुदरत का एक क़ायदा समझा,
हमने इश्क़ में नुक़सान को भी फ़ायदा समझा

मैं सारे ग़म भुलाकर हाल – ए – दिल कहता हूँ,
ज़माना कहता है कि मैंने पी रख़ी है

आज उनकी ज़ुल्फ़ों से हवा ली है,
इसी ख़ुशी में मरने की क़सम ख़ा ली है

जिस्म जमीं के नीचे और अरमाँ और कहीं हैं ,
वो मरने का शौक़ पाल रहे हैं जो ज़िन्दा ही नहीं हैं

उनसे हमें बेहद ख़तरा है जान,
जो दिल चुराने के बाद नज़रें चुराते हैं

हसीनाओं को कर हलाल दूँगा ,
मैं सबको अपनी आदत डाल दूँगा

ख़ुदा के हुक़्म में सदाक़त है ,
ये जो मौत आलम गूँज रहा है
संभलकर निकलियेगा बाहर ,
यही ख़तरा हमें भी ढूंढ रहा है

अब जीतकर हार से हारा कैसे जाये ,
जो चीज़ ज़िन्दा ही नहीं उसे मारा कैसे जाये

चोरों की नज़र दूसरों के घरों पर ही रहती है,
पर दुनियां की नज़र तो दूसरों पर ही रहती है

सुना है वो रोज़ एक शिकार कर रहे हैं ,
उन्हें आज़माने का हम भी इंतज़ार कर रहे हैं ,
हमने अपने कुछ अज़ीज़ों को उनके घर भेजा ,
अब वो हमें ही पहचानने से इनकार कर रहे हैं


यशु जान द्वारा दिया गया परिचय :-

यशु जानयशु जान (9 फरवरी 1994) एक पंजाबी कवि और लेखक हैं। वे जालंधर सिटी से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं । उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीत, कविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं। वे अपनी उपलब्धियों को अपनी पत्नी श्रीमती मृदुला के प्रमुख योगदान के रूप में स्वीकार करते हैं।

यशु जान ने शायरी की दुनियां में क़दम दस साल की उम्र में ही रख़ दिया था उन्होंने अपने स्कूल के वक़्त अपनी शायरी
स्कूल की सभा में सुनानी शुरू की फ़िर जैसे – जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई उनका शायरी लिख़ने का जुनून भी बढ़ता गया |
यशु जान जी का पूरा नाम “यशु जान जालंधरी” है कुछ लोग़ उन्हें “इंदौरी जी” और “इंदौरी साहब” कहक़र भी नवाज़ते हैं
क्योंकि वो मशहूर शायर श्री “राहत इंदौरी” जी को अपना उस्ताद मानते हैं |

आपको बतादें कि जबसे उनकी शायरी ऑनलाइन प्रकाशित होने लगी है तबसे उनको सुनने और उनकी शायरी पढ़ने वालों की तादात बढ़ने लगी है और तो
और बहुत ही जल्द उनका एक पंजाबी गाना भी आ रहा है |

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