नारी शक्ति के ऊपर कविता :- नारी जब-जब

नारी शक्ति के ऊपर कविता ( Hindi Poem On Nari Shakti ) में पढ़िए क्या है इस सृष्टि में नारी की महानता और उसकी महिमा का वर्णन :-

नारी शक्ति के ऊपर कविता

नारी शक्ति के ऊपर कविता

नारी जब-जब
मायुस होती है
धरा चक्र मानो
रुक सा जाता है

नारी जब-जब
मुस्कराती है
नभ भी मानो
थोड़ा सा झुक जाता है

पर नारी की
अनुचित हँसी देख
इक महाभारत
रचित सा होता है

और उसी नारी की
निश्छलता पर..
भागीरथी भी
सकुचाने लगती है

नारी जब-जब
जिद पर आती है
देख सतीत्व, यमराज भी
हार जाता है

नारी जब-जब
देती है अग्नि परिक्षा
पुरुष के पुरुष होने पर
एक गहरा प्रश्नचिन्ह लगता है

नारी जब-जब
बिलखाके रोती है
सीना धरती का
फट जाता है

रिश्तों को निभाते-निभाते
तन मन परमाणु में
बंट जाता है

दोहा:
नारी नारी मत करो
नारी गुण की खान,
नारी से पैदा हुए
चौबीसौं भगवान।

पढ़िए :- नारी पर कविता “सृष्टि ने रचा है तुझको”


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Praveen Kucheria

Praveen Kucheria

मेरा नाम प्रवीण हैं। मैं हैदराबाद में रहता हूँ। मुझे बचपन से ही लिखने का शौक है ,मैं अपनी माँ की याद में अक्सर कुछ ना कुछ लिखता रहता हूँ ,मैं चाहूंगा कि मेरी रचनाएं सभी पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें।

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