इंतजार पर कविता :- बस लम्बा इन्तजार | Intezar Par Kavita

1+

आप पढ़ रहे हैं ( Intezar Par Kavita ) इंतजार पर कविता ” बस लम्बा इन्तजार ” :-

इंतजार पर कविता

इंतजार पर कविता

इन्तजार ..इन्तजार ! बस लम्बा इन्तजार …

आँखों मे सजाए दिल में बिठाए किसी का प्यार,
जन्मों से बैठी हूँ कर कर सुबह से शाम इन्तजार,
आती है जाती है एक एक कर ॠतुएं और बहार;
सोचती हूँ कभी तो खत्म होगा ये लम्बा इन्तजार!

आस न टूटने दूगी मैं रटुंगी आठ पहर नाम तेरा,
जलाए रखुंगी अखण्ड दिया जिस पे  नाम तेरा
ना है कोई मकसद ना है करना कोई  सफर पुरा;
मुझ को तो बस मिल जाए कहीं पर दिदार तेरा।

अश्क बहते हैं बहने दो रात ढलती है ढलने दो,
घटा घिरती है घिरने दो,बादल फटता है फटने दो,
कयामत तक करेंगे इन्तजार हम तुम्हारा साजन;
हो गयें तैयार , मौत को भी जोर आजमा लेने दो।


इन्दु तोदीयह कविता हमें भेजी है इन्दु तोदी जी ने धरान (नेपाल) से।

( Mitti Ki Mahima Par Kavita ) “ मिट्टी की महिमा पर कविता ” के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

1+

Leave a Reply