एकल जीवन है एक संघर्ष :- अकेली नारी के दर्द पर कविता

एकल जीवन है एक संघर्ष

एकल जीवन है एक संघर्ष

एकल जो जीवन यापन करती,
उनका क्या, कहना!
इस जीवन में, वो ही तो है,
सबसे बड़ी योद्धा।

हर चुनौतियों को जो स्वीकार करती,
खुद ही खुद को हौसला दे,
स्वयं को मजबूत बनाती।

हर परिस्थिति का
बेखौफ सामना कर,
एकल होकर भी बच्चों के लिए
मां-बाप दोनों वक्त -वक्त पर बनती।

पल-पल हुए अपमान को सहती,
लोगों से अभागन शब्दों का ताना है सुनती।

तिरस्कार होता पल पल
उसका अपने ही घर में,
कोई उम्मीद ना बचती
फिर उसके मन में।

फिर भी निरंतर बढ़ाती रहती,
कदम आगे जीवन में।
खुशी समझती अपनी,
हर गम वाले मातम में।

हम सबों की छोटी-छोटी कोशिश,
खिल-खिला देगी उनका अंतर्मन,
सम्मान करें अगर उनका हम।

बड़ी ही कठिन राह से गुजारती,
एकल अपना जीवन।

यह बात ना होगी कुछ कम …..
जब हर गली, हर शहर और जन-जन में
एकल के सम्मान का परचम,
अगर लहरा दें हम।


यह कविता हमें भेजी है मनीषा मारू जी ने विराटनगर, नेपाल से।

“ एकल जीवन है एक संघर्ष ” ( Kavita Ekal Jivan Hai Ek Sangharsh ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

 

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *