माँ बाप का दर्द कविता :- मां पापा ने तो ज़िन्दगी दी

क्या होता है बुढ़ापे में कई माँ-बाप का दर्द आइये जानते हैं माँ बाप का दर्द कविता ” मां पापा ने तो ज़िन्दगी दी ” में :-

माँ बाप का दर्द कविता

माँ बाप का दर्द कविता

छोटी सी फैमिली बड़ी सी खुशियां
कुछ हसीन यादों की अनमोल थी दुनिया।

प्यार था अपनापन था
सपनों का संगम था,
पर जाने कैसी नज़र लगी
कुछ पल में सबकुछ बिखर चल।

मां पापा ने तो ज़िन्दगी दी
अपना गम भूलकर हमें सारी खुशी दी,
सपनों का आसमान दिया
प्यार का उड़ान दिया
जिद भी पूरी की और जीने का पहचान दिया,
हर मुश्किल में हमारा साथ दिया
रोटी कपड़ा और मकान।

फिर क्या कमी रह जाती है
उन माता पिता की दुआओ में?
जिन्हें अपने ही बच्चे दर्द दे जाते हैं,
जिन्दगी की राहों में,
जिन्होंने सर उठाकर चलना सिखाया
क्यों बच्चो ने उनका सर झुकाया।

जो आंसू गिराकर भी शायद
कभी खुश नहीं रह सकते,
बच्चो ने उन्हें इस कदर क्यों रुलाया,
खुशियां उनकी उदासी में बदल गई,
जिन पर नाज़ था वो उम्मीद ही बिखर गई।

जिन्होंने सोचा था ये ज़िन्दगी में सहारा बनेंगे
हौसला देंगे और सितारा बनेंगे,
अब तो वो चाहत भी टूटकर बिखर गई।

जो ज़िन्दगी की हालातो में
अपनों के लिए दुनियां से लड़ जाता है,
अक्सर ऐसा क्यों होता है
इन्सान अपने अपनों से ही हार जाता है।


ज्योति मौर्यायह कविता हमें भेजी है ज्योति मौर्या जी ने जौनपुर से।

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