महाशिवरात्रि पर कविता :- आई शिवजी की है शादी

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि पर्व भगवान शिव और देवी पार्वती जी के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। आइये पढ़ते हैं महाशिवरात्रि पर्व को समर्पित ( Mahashivratri Par Kavita ) महाशिवरात्रि पर कविता “आई शिवजी की है शादी”

महाशिवरात्रि पर कविता

महाशिवरात्रि पर कविता

आई शिवजी की है शादी
जैसा वर वैसे बाराती।

ब्याहने शिव चले हैं गौरा
खाकर भांग और धतूरा,
शंकर की बारात निराली
भूतों की टोली मतवाली।

भस्म रमाये हैं त्रिपुरारी
पार्वती सुंदर राजकुमारी,
शिव तो हैं बैरागी ध्यानी
पर पार्वती एक ना मानी।

वन -वन में पड़ेगा भटकना
भांग तुमको होगा रगड़ना,
इसके लिए महल ठुकराती
सखी सहेलियां हैं चिढ़ाती।

जनम जनम से हैं मेरे वर
अब तो जाऊं बस उसके घर,
मैं हूँ उनकी ही दीवानी
मेहंदी ब्याह की रचानी।

पढ़िए :- राधा-कृष्ण प्रेम कविता “बिन डोर बंध गई हूँ”

“ महाशिवरात्रि पर कविता ” ( Mahashivratri Par Kavita ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

Sarika Agrawal

Sarika Agrawal

यह रचना है सारिका अग्रवाल जी की जो कि बिरतामोड, नेपाल में रहती हैं।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published.