मंच पर हिंदी कविता :- मिला ऐसा मंच ये

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मंच पर हिंदी कविता

मंच पर हिंदी कविता

शब्दों के भावों से मचल ही जाते हैं
तभी हम जैसे दिल पिघल जाते हैं
नदियों के साथ यूं बहते चले जायें
सीमा लांघ तालाब से निकल जाते हैं।

अभी तो चट्टानों का ही सामना कर रहे हैं
पत्थरों को पिघलाने का प्रयास कर रहे हैं
सागर से मिलकर मिठास खो ना जाये
मंजिल से ना भटके कोशिश यही कर रहे हैं।

मिला ऐसा मंच ये तो किस्मत की बात है
कवियों के मिलते यहां दिल के हर जज्बात है
खिलती है कलियाँ किरणों की
कई फूल कई रंग साथ तारों की बारात है।

पढ़िए :- कविता पर कविता “कविता इश्वर की प्रार्थना है”


सारिका अग्रवालयह कविता हमें भेजी है सारिका अग्रवाल जी ने जो कि बिरतामोड, नेपाल  में रहती हैं।

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