नरेन्द्र मोदी पर कविता – भारत की डोर

 Poem On Narendra Modi In Hindi दोस्तों आज पढ़ेंगे नरेन्द्र मोदी पर कविता – भारत की डोर , जी हाँ इस बार लोकसभा चुुनाव में हमने देखा कि किस तरह से सारा विपक्ष एक तरफ और सदी का महानायक यानी कि हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी एक तरफ, अकेले भारी मतों से दूसरी बार विजयी हुए । तो उनकी जीत पर दिल से जो शब्द निकलते हैं वो कुछ इस तरह से हैं।

दोस्तों मेरी यह कविता भारत की डोर, वीर रस की कविता है। इस कविता के माध्यम से बताया गया है कि किस तरह से आजतक के सत्ता लोभी हुक्मरानों ने देश को बर्बादी की तरफ धकेल दिया। तो आइए पढ़ते हैं मोदी जी की जीत पर कविता – भारत की डोर 

नरेन्द्र मोदी पर कविता

नरेन्द्र मोदी पर कविता

विपक्षियों ने बिना सोचकर, कहा चौकीदार चोर है।
समर्थकों ने कहा जोश में नहीं चौकीदार प्योर है।
भारत माँ का लाल है छप्पन इंची सीना रखता है।
केदारनाथ का भक्त है वह सांपों के विष चखता हैं।

भारत माँ की शान की खातिर,संघर्ष प्रतिदिन करता है।
आस्तीन के सांप हो तुम, वह कभी न तुमसे डरता है।
तुम जैसे गद्दारों ने ही, साठ साल तक खून पिया।
विश्वास किया जनता ने और गला भी उसका घोंट दिया।

मिलावट का दूध पिये तुम, मोदी से नहीं लड़ सकते हो।
जहाँ मिले धन अधिकाधिक वहीं कहीं तुम बिकते हो।
भारत तेरे टुकड़े होंगे जे एन यू वाले कहते थे।
तुमने भी तो साथ दिया जो इंसाहल्लाह कहते थे।

सबूत मांगकर तुमने क्यूँ सेना का अपमान किया।
पाकिस्तान की मन इच्छा का तुमने ही सम्मान किया।
धर्म के नाम पे तुमने देखों कैसे जंगल राज किया।
हिन्दू मुस्लिम कर तुमने,अधर्म का था काज किया।

पहचाना है सबने, तुम सत्ता के भूखे गिद्धों को।
रौंद दिया था तुमने कैसे, चौरासी में सिक्खों को।
कैसे माफ करेंगी जनता,घर में पले तिलचट्टों को।
मोदी जी ही साफ करेंगे भ्रस्टाचार के छत्तों को।

संघर्षों का फल है यह और संस्कारों की जीत है।
परिवारवाद की तोड़ी बेड़ियां,सदियों की जो रीत है।
आयी है सरकार उन्ही की पूर्ण बहुमत लायी है।
देखो कैसे भारत के, घर-घर में खुशियाँ छाई है।

दिखा दिया है सबको फिर,आजादी कैसे आयी थी।
चरखे ने बस ऊन थी काती,वीरों ने आजादी लायी थी।
देखो फिर गुलाब का फूल कैसा मंजर लाया था।
भारत माँ की छाती पर कैसा कहर वो ढाया था।

तोप घोगाले में बेटे का नाम न कहीं पर था आया।
मोदी जी की छाती ने फिर आईना सबको दिखलाया।
बेटा था मन्दबुद्धि जिनका पत्नी इटली से आई थी।
कहते हैं सब पप्पू उनको,अक्ल न उनको भाई थी।

चुनाव के परिणामों ने फिर कैसा इतिहास रचाया था।
मोदी जी की खातिर सबने,कमल फिर से खिलाया था।
भारत की पावन धरती ,फिर से भगवा कर डाली है।
स्वार्थ का कोई भाव नहीं बस देश का बना माली है।

कहते थे तुम बिना सबूत के चौकीदार चोर है
गली गली में भारत की फिर,देखो कितना शोर है।
सीना तो छप्पन इंची है ही बाजुओं में भी उसका जोर है।
आंख फाड़कर देखो मोदी के, हाथों में भारत की डोर है।

पढ़िए – स्व.सुषमा स्वराज पर दर्द भरी हिंदी कविता


हरीश चमोली

मेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

“ नरेन्द्र मोदी पर कविता ” के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

 

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *