पर्यावरण पर हिंदी कविता – सौगंध उठायें | Paryavaran Kavita

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पर्यावरण पर हिंदी कविता

पर्यावरण पर हिंदी कविता

आओ हम सौगंध उठायें।
देश को निर्मल स्वच्छ बनाये।
सारे पर्यावरण को शुद्ध बनाये।
आओ हम सब वृक्ष लगाऐ।
घर के कचरे के लिए ।
घर मे दो कूड़ादान बनाये।
आओ हम सौगंध———-

जब भी हम बाजार को जाये।
साथ मे अपना झोला ले जाये।
प्लास्टिक पोलीथिन से मुक्ति पाये।
भारत को पोलीथिन मुक्त बनाये।
आओ हम सौगंध——–

देश नदियाँ कल कल बहती।
पूजन वेल पत्र की सामग्री।
और गंदे अवशेषों को न बहाये
इनको निर्मल पावन स्वच्छ बनाये।
आओ हम सौगंध———

घर के चूल्हे के धुएं से मुक्ति पाये।
उज्जवला योजना का लाभ उठाये।
गोबर गैस से गैस बनाये
बिजली के बिल से राहत पाये।
आओ हम सौगंध ———-

हर पंचायत से एक एक वाहन भिजवाए।
घर घर से वह कचरा लाये ।
सारे कचरे से खाद बनाये।
पंचायत की आय बढाये ।
आओ हम सौगंध ——–

बहू बेटियाँ घर की शान
फिर बाहर उन्हें क्यों शौच कराये।
आओ घर घर शौचालय बनबाये।
शौचालय का उपयोग करायें ।
आओ हम सौगंध ———

  पढ़िए – कविता पर्यावरण पर “वृक्ष काटने से कहीं खो गया”


रचनाकार परिचय –
मैं सौदामिनी खरे पति स्व0अशोक खरे

जन्म तिथि :- 25/08/1963

मैं एक शिक्षिका हूँ रायसेन जिले की निवासी हूँ। हिन्दी साहित्य की सेवा करना अपना सौभाग्य समझती हूँ, सभी रस पर लेखन करना मेरी विधा गीत, गजल, दोहे छंद कविता नज्म आदि है।

अभी तक साझा संकलन, कश्तियो का सफर ,काव्य रंगोली में, तथा मासिक पत्रिका ग्यान सागर मे प्रकाशित हुई है हिन्दी भाषा डाट काम पर भी रचनाऐ प्रकाशित हुई है,नव सृजन कल्याण समिति की फाउन्डर मेम्बर मे मीडिया प्रभारी हूँ ।

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