आज़ादी का अमृत गीत | Azadi Ka Amrit Geet

आज़ादी का अमृत गीत

आज़ादी का अमृत गीत

आज़ादी का अमृत गीत

आज़ाद वतन की माटी
अब इतनी खामोश क्यों हैं ?
आज़ादी में रहने की,
क्या हमको कोई आदत ही नही
आज़ाद चमन है आज़ाद गगन है
पवन भी है आज़ाद अब
डर दिल में, भय मन में और
सच कहने की आदत ही नही ।।

आज़ादी का पावन पर्व
क्यों सूना सूना लगता है ?
अपनी शासन में रहना और
जीना दूभर लगता है
ऐसा ही होना था तो क्यों
वतन आज़ाद लिया हमने ?
आज़ादी लेने की खातिर
हर दिन जिया मरा हमने ।।

बंदिश में गर रहना है तो
आज़ादी का मतलब क्या ?
बात बात पर रंजिश हैं तो
आज़ादी का मतलब क्या ?
बोलने पर पाबंदी हो तो
आज़ादी को फेल ही समझो
हर बातों पर गर्दिश हैं तो
आज़ादी का मतलब क्या ।।

आज़ादी के नारों से अब
भय सा लगने लगता है
इन नारो के साये में कोई
हमको ठगने लगता है
छीन लिया आज़ादी सबकी
आज़ादी के नारों से
गाकर गीत आज़ादी का
घर अपना भरने लगता है ।।

पढ़िए :- आजादी पर हिंदी कविता – तिरंगे को पकड़े 


रचनाकार का परिचय

बिमल तिवारी

 यह कविता हमें भेजी है बिमल तिवारी “आत्मबोध” जी ने जिला देवरिया, उत्तर प्रदेश से। बिमल जी लेखक और कवि है। जिनकी यह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है :- 1. लोकतंत्र की हार  2. मनमर्ज़ियाँ  3. मनमौजियाँ ।

“ आज़ादी का अमृत गीत ” ( Azadi Ka Amrit Geet ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते है लिखने का हुनर और चाहते है कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published.