पिता की दर्द भरी शायरी :- पिता पर दो लाइन शायरी

पिता की दर्द भरी शायरी ( Pita Ki Dard Bhari Shayari ) – प्रिय पाठकों, आज तक बस हमने पिता दिवस पर शायरी पढ़ी है। आज पढ़ें पिता पर शायरी वो भी दर्द भरी दो लाइन शायरी । जी हाँ, हम हमेशा तारीफें ही सुनते आये हैं। किन्तु आज उस पिता का दर्द भी सुनिए जिसने अपने बच्चों के लिए जीवन भर कोई कमी नहीं की, उन्ही बच्चों ने आज ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं की कलम सोचने पर मजबूर हो गयी कि आजतक हम जो लिखते क्या वह शत प्रतिशत सच है?

नहीं , क्योंकि जीवन की सच्चाई कुछ और ही कहती है। अगर सब कुछ वैसा ही होता जैसा हम पढ़ते आये हैं। तो आज देश में एक भी वृद्धाश्रम नहीं होता न ही कोई अपने माता – पिता को छोड़कर दूर जाता , यह शायरियाँ पिता पुत्र के संबंधों को बयाँ करती है, तो आइये पढ़ते हैं ” पिता पर शायरी ”

पिता की दर्द भरी शायरी

पिता की दर्द भरी शायरी

१.
सर से जब भी पिता का हाथ उठेगा।
असली सबक जिंदगी का तब ही मिलेगा।

२.
पछताओगे गर सताया होगा पिता को कभी।
गुजरने के बाद उसकी, बस जिंदा बचेंगी यादें सभी।

३.
पिता की लाठी कठोर होती है किंतु हमें गिरने नहीं देती।
सम्भालना उसे उम्र के पड़ाव में, क्योंकि टूटी लाठी सहारा नहीं देती।

४.
सींचकर रक्त पसीने से पिता ने साम्राज्य स्थापित किया।
और उसकी ही औलादों ने उसे खुद के घर से विस्थापित किया।

५.
बरगद के पेड़ सा पिता अब बूढ़ा हो गया है,
फिर भी पिता अपने बच्चों से लगाव रखता है।

६.
ठुकरा दिया उसे आज उन्होंने ही बेवजह
जिनके लिए पिता ने अपनी ख्वाइशों को मारा है।

७.
अपनी कोई फिक्र नहीं,औलाद का चिंतन किया।
छोड़ दिया तन्हा किया,फिर भी औलाद का क्रंदन किया।

८.
औलादों की खातिर अपने कितने सपनों का त्याग किया,
मौज के लिए अपने ही बच्चों ने पिता का परित्याग किया।

९.
पढ़ा लिखाकर जिसने था अपने बच्चों को बढ़ा किया।
उन्ही बच्चों की सोच ने फिर पिता को वक़्त से पहले बूढा किया।

१०. 
जिंदगी भर कमाता रहा जिन बेटों की खातिर।
लूट कर उस पिता का सब कुछ बेटे बन बैठे शातिर।

११.
पूरा जीवन जिसने औलादों की खुशी के लिए श्रम किया।
उन्ही औलादों ने आज बुढ़ापे में पिता को बृद्धाश्रम दिया।

१२.
यह उम्मीद तो न कि थी उस पिता ने उनसे
की छोड़ अकेला चले जाओगे तुम शहर में ।

१३.
पिता के बीमार होने पर भी एक गिलास न देता है पानी
वो बेटा जिसे खाना-पीना सब बिस्तर पर दिया पूरी जवानी ।

१४.
पिता की मजबूरियाँ एक ओर और बेटे की ख्वाइशें एक ओर
पूरे जीवन की पूंजी झोंक दी पिता ने,बच्चों की ख्वाइशों के लिए।

१५.
पिता की मजबूरियों और बच्चों की ख्वाहिशों को एक तराजू पर तोलें।
पिता के स्नेह का पलड़ा हमेशा बच्चों की ओर ही झुकेगा।

पढ़िए – माता पिता का दर्द कविता “एक तुम्हीं से आशा थी”


profile-imageहिंदी प्याला ब्लॉग के समस्त सदस्यों को मेरा सादर नमन। मेरा नाम हरीश चमोली है ।मैं उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के एक छोटे से शहर चम्बा का रहने वाला एक कवि हृदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से हृदय में देशभक्ति के भाव और अपनी भाषा के लिए समर्पण का भाव लिए कुछ न कुछ लिखने का शौक रखता हूँ। बस इसी सकारात्मक सोच के साथ जीवन मे आगे बढ़ना चाहता हूँ और जीवन के किसी भी पड़ाव में कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

मेरा परिचय एवं उपलब्धियां निम्न हैं – नाम- हरीश चमोली पिता का नाम -श्री राजेंद्र प्रसाद चमोली माता का नाम – श्रीमती प्रेमा देवी चमोली जन्म तिथि – 21जनवरी1991 जन्म स्थान – ग्राम- डोबरा, पट्टी – सारज्यूला, जिला- टिहरी गढ़वाल ( उत्तराखंड ) स्थाई निवास – चम्बा, टिहरी गढ़वाल ,(उत्तराखंड) शिक्षा – डिप्लोमा इन हॉस्पिटैलिटी (देहरादून) व्यवसाय – फ़ूड न बेवरेज इंडस्ट्री प्रेरणा श्रोत- सुशील चमोली एवम दीक्षा बडोनी रूचि – कविता लेखन /समाज सेवा उपलब्धियां – स्वरचित कविताएँ अनेक डिजिटल पोर्टल पर प्रकाशित होती रहती हैं तथा “शब्दों की पतवार” नामक साझा काव्य संकलन प्रकाशित है।

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