वसंत ऋतु पर कविता – मेरे प्रिय बसन्त | Poem On Basant Ritu

वसंत ऋतु पर कविता ( Poem On Basant Ritu In Hindi ) – प्रिय पाठकों पतझड़ में जब सभी पेड़ों से हरियाली गायब हो जाती है। तब उसके बाद बसन्त ऋतु आती है। जिसमें चारों और हरियाली हो जाती है। कोयल अपने गीत सुनाती है और आमों पर बौर आने लगती है। सरसों की फसल खेतों में पीली चादर डाले रहती है। जिसकी भीनी-भीनी सुगंध हवाओं को महकाती रहती है। सूरज भी न ज्यादा गरम होता है न ज्यादा नरम। मन चारों और की खूबसूरती देख कर आनंदित होता रहता है। कुदरत में एक नई जान फूंक देती है यह ऋतु। आइये पढ़ते हैं उसी बसंत को समर्पित यह बेहतरीन हिंदी वसंत ऋतु पर कविता “मेरे प्रिय बसन्त”

वसंत ऋतु पर कविता

वसंत ऋतु पर कविता

जीवन की मादक घड़ियों में
मुझको मत ठुकराना मेरे प्राण प्रिय,
नव ऊषा लेकर आयेगी
जब मधुमय जीवन लाली,
कुहू -कुहू कर बोलेगी
जब कोयल काली, काली।

नव रस से भर जायेगी
जब बसन्त की बारी-बारी,
पी-पी के स्वर में चातक,
जब उड़ेल दे स्वर की थाली
ऐसी मधुमय घड़ियों में तुम
विरह के गीत न गाना मेरे प्राण प्रिय।

मादक यौवन में जब भौंरे
फूलों पर गुन-गुन गाएं
लहर छहर कर प्रकृति विचरती,
हो जब कोमल रचनाएं।
तब ऐसी मधुमय बेला में,
पलभर तुम मुस्काना मेरे प्राण प्रिय।

चूम धरा जब हंसती हो
नटखट बदली सावन वाली
मधुरिम क्षणों में भर लाए हो,
वह अपनी जीवन प्याली,
ऐसी सुखदाई घड़ियों में
पास तनिक तुम आना मेरे प्राण प्रिय।

पढ़िए :- बसंत पर कविता “देखो आ गयी बसंत”


रचनाकार का परिचय –

कालिका प्रसाद सेमवाल

नाम—कालिका प्रसाद सेमवाल
शिक्षा—एम०ए०, भूगोल, शिक्षा शास्त्र
आपदा प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास फाउंडेशन कोर्स विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बी०एड० सम्प्रति व्याख्यात
सेवारत —जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा रूद्रप्रयाग उत्तराखंड
प्रकाशित पुस्तकें–रूद्रप्रयाग दर्शन
अमर उजाला,दैनिक जागरण ,हिंदुस्तान व पंजाब केसरी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में धर्म संस्कृति व सम सामयिक लेख प्रकाशित होते हैं ,उत्तराखंड विघालयी शिक्षा की हमारे आसपास,कक्षा 3,4,5, और कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक लेखन समिति के सदस्य और लेखक भी हैं।

अब तक प्राप्त सम्मान—
रेड एण्ड व्हाईट पुरस्कार, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्यभूषण, साहित्य मनीषी,अन्य मानस श्री कालिदास सम्मान,उत्तराखंड गौरव साहित्य मण्डल, श्रीनाथ द्वारा साहित्य रत्न, साहित्य महोपाध्याय सम्मानोपधि व देश की विभिन्न संगठनों द्वारा साहित्य में पचास से अधिक सम्मान मिल चुके है
पता—मानस सदन अपर बाजार
रूद्रप्रयाग उत्तराखंड
पिनकोड 246171


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