होली की मस्ती कविता :- होली का त्योहार | Poem On Holi

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भुलाएँ सभी नफरतें और रहें सब मिल जुल कर। होली में करें खूब मस्ती। यही सन्देश दे रही है जगवीर सिंह चौधरी जी द्वारा रचित ( Poem On Holi Festival In Hindi ) होली की मस्ती कविता ” होली का त्योहार है ” :-

होली की मस्ती कविता

होली की मस्ती कविता

होली का त्योहार है ,
सबसे दिव्य अनूप।
सभी मनाएं प्रेम से ,
निर्धन हों या भूप ।।

निर्धन हों या भूप ,
मनाते सब मिल जुलकर।
लगाते रंग – गुलाल ,
प्रेम के रंग में घुलकर ।।

भूलो मन के भेद ,
यही है मेरा कहना ।
मिलो सभी हरषाय ,
और मिलजुल कर रहना ।।

हरि का सुमिरण करो,
प्रेम से बोलो बोली ।
कहे ‘जग्गा’ समझाय,
खेलिए दिल से होली ।।

पढ़िए :- होली पर कविता ” ये रंगों की होली “


रचनाकार का परिचय

जगवीर सिंह चौधरीयह कविता हमें भेजी है जगवीर सिंह चौधरी जी ने लोहकरेरा, रुनकता, आगरा से।

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