राधा कृष्ण प्रेम पर कविता – दिल का नज़राना भेजा है कान्हा |

प्रिय पाठकों, राधा कृष्ण प्रेम पर कविता ( Radha Krishna Prem Par Kavita ) – दोस्तों मै आपको बता दूँ कि भक्ति की शक्ति में भी एक अलग ही आनंद है ,प्रेम तो केवल इंसान से ही नहीं अपितु भगवान् से भी होता है बल्कि यूँ कहें की जो मन को भा गया उसी से प्रेम हो जाता है ,ऐसा ही वर्णन किया गया है इस गीत में गोपियों को भगवान् कृष्ण से प्रेम हो जाता है और अब वो उन्हें फिर से वृन्दावन आने का न्योता दे रही हैं , तो आइये आनंद लेते हैं इस गीत का –

राधा कृष्ण प्रेम पर कविता

राधा कृष्ण प्रेम पर कविता

 

दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

तुम पर दिल हम हार चुके है।
अपना सब कुछ वार चुके है।
हुए जैसे बिन जल रहती मीन
तुम दर्श दिखाने आ जाना।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

वह यमुना का तट और वह
झुकी कदंमब की डाली।
जिसे देख मे हूँ पुलकित।
तुम वंशी बजाने आ जाना।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

तुम बिन सूनी दहिया की मटकी।
सूनी तुम विन बजरिया मथुरा की।
राह ताक रहे हम सब कब से
तुम मटकी फोड़ने आ जाना।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

कानन कानन भटक रहे हैं।
तेरे दर्शन को तरस गये है।
लता पत्र सब पूछ रहे है।
तुम गौऐ चराने आ जाना।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

राधा के तो हाल बुरे हुवे है।
आखों के आँसू सूख गये है।
बेबस सी इस राधा को ।
तुम धीर बंधाने आ जाना।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

जबसे कान्हा परदेश गये है।
जीना हम तो भूल गये है।
एक आस तुम से है मोहन।
फिर इक झलक दिखला जाना।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

यह प्रेम ग्रन्थ बड़ी कठिन पंथ है।
हम केवल तेरे है आराधक।
हो पूर्ण आस लगी दिल मे त्रास।
तुम प्यास बुझाने आजाना।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

हे मोर मुकुट पीताम्बर धारी,
तेरी महिमा कहके कलम भी हारी।
तुम आन वसो मेरे मन मे,
यह दामिनी की है विनय तुमसे।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

मै दीन हीन हूँ अति मलीन हूँ।
मेरी काली चुनर है अति भारी।
धुबिया बन के आ यमुना के तीर।
मेरी काली चुनर कर दे प्यारी।
दिल का नज़राना भेजा है कान्हा।
तुम रास रचाने आ जाना।

पढ़िए – कृष्ण प्रेम पर कविता “तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा”


रचनाकार परिचय

मैं सौदामिनी खरे पति स्व0 अशोक खरे।

मैं एक शिक्षिका हूँ रायसेन जिले की निवासी हूँ। हिन्दी साहित्य की सेवा करना अपना सौभाग्य समझती हूँ, सभी रस पर लेखन करना मेरी विधा गीत, गजल, दोहे छंद कविता नज्म आदि है।

अभी तक साझा संकलन, कश्तियो का सफर ,काव्य रंगोली में, तथा मासिक पत्रिका ग्यान सागर मे प्रकाशित हुई है हिन्दी भाषा डाट काम पर भी रचनाऐ प्रकाशित हुई है,नव सृजन कल्याण समिति की फाउन्डर मेम्बर मे मीडिया प्रभारी हूँ ।

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