रूठना मनाना ग़ज़ल – मनाना नहीं आता

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रूठना मनाना ग़ज़ल – रूठे प्रेमी को मनाने के लिए सुन्दर सी गजल
प्रिय पाठकों आज आप सबके लिए प्रस्तुत है कामिनी गुप्ता जी की बेहतरीन ग़ज़ल रूठे हुए प्रेमी को मनाने के लिए , तो आइये पढ़ते हैं –

 

रूठना मनाना ग़ज़ल

रूठना मनाना ग़ज़ल

बातें भी तो हमें इतनी बनाना नहीं आता।
रूठे रहते हो तुम यूं मनाना नहीं आता।

कह कह के तुमको हम तो हार गए हैं ;
गीत प्यार का भी तो सुनाना नहीं आता।

वो रेत के महल देखो बनाने लगे हैं अकसर ;
ऊंचे महलों में शायद दिल लगाना नहीं आता।

वक्त का क्या है वो तो यूं भी बदल जाएगा ;
बदल गए हैं हम अब ये बहाना नहीं आता।

पा ही लेते तुमको गर आती हमें भी अदाएं ;
चाहते हैं तुम्हें कितना ये भी जताना नहीं आता।

मिलो न गर जीवन में इक कमी सी सदा रहेगी ;
बात ये भी दिल की मिल के बताना नहीं आता।

यादें तो बस यादें हैं ये रुकती नहीं चाहने से;
प्यार में तुम्हारे दीवानापन छुपाना नहीं आता।

अब कोई कहे हमें नादां तो हैरत नहीं होती;
प्यार तो बस प्यार है इसे भुलाना नहीं आता।

तुम जो कहो तो चले जाएं शहर से तुम्हारे;
तुम्हें देख कर हमें आंखें चुराना नहीं आता।

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मेरा परिचय

कामिनी गुप्ता

नाम. : कामिनी गुप्ता

पिता : श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता

जन्म स्थान. : जम्मू(जम्मू कश्मीर)

जन्म तिथि : 18:02:1978

शिक्षा : एम. एस.सी.(गणित)

विशेष. : पांच साँझा संग्रह में
प्रकाशित रचनाएं तथा विभिन्न अखबारों में प्रकाशित रचनाऐं

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