होली पर कविता :- ये रंगों की होली | Holi Par Hindi Kavita

आप पढ़ रहे हैं होली के पावन अवसर पर संदीप सिंधवाल जी द्वारा रचित बेहतरीन ( Holi Par Hindi Kavita ) होली पर कविता “ये रंगों की होली” :-

होली पर कविता

होली पर कविता

ये रंगों की होली
एक बार आती बरस में
इधर होली रंगते
दिखाई देते हैं हर पल में।

सफेद आगोश में छुपे रंग
लाल गुलाल सा बहता खून
गिरगिट सा समाए हैं रंग
पल पल बदलता वक्त पर।

केसरी हरे रंग पर रोज
खेली जाती दंगाई खूनी होली
रंगीन दागों से दगे नेता
पहनते सच्चा सफेद चोला।

काला अंधकार अपराध का
नीला जहर उगलती सियासत
पीले पवित्र वस्त्र की आड़ में
कलंकित होती भक्ति आस्था।

चेहरों का रंग हवश का शिकार
सच में ये दुनिया रंगों में रंगी है
यहीं होली रोज खेली जा रही है
रंगों की परिभाषा बदल गई है।

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Sandeep Sindhwal

Sandeep Sindhwal

मैं संदीप सिंधवाल संजू पुत्र श्री तुंगडी सिंधवाल रौठिया रुद्रप्रयाग उत्तराखंड का निवासी हूं। मैंने हिंदी में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम. ए. किया है तथा कलनरी आर्ट फूड साइंस में बी. एस. सी. किया है। 5 साल दिल्ली के एक होटल में शेफ की नौकरी करने के पश्चात मै 5 साल से ऑस्ट्रेलिया के समीप पोर्ट मोरस्बी में कार्यरत हूं। मेरा व्यवसाय मेरे लेखन से बिल्कुल विपरीत है। विदेश में रहकर भी मैंने बहुत कविताएं लिखी हैं। मै सन 2000 से कविताएं लिखता हूं जो विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। मैट्रिक पास करने के बाद ही मेरी कविता रचना में रुचि बढ़ी। भगवान रुद्र पर कविता लिखना मेरा सौभाग्य है। विदेशों में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए भरसक प्रयास करता हूं।

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