जिंदगी पर कविता :- ऐ जिंदगी मुश्किलों को टाल | Hindi Poetry On Life

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जिंदगी पर कविता

जिंदगी पर कविता

कब तक आह भरती रहोगी
तुझ पर सारा दारोमदार था,
ऐ जिंदगी मुश्किलों को टाल
राहतों का हमें इंतजार था।

सच पे क्यूँ झूठ की परत डाल ली
आँखों पे क्यूँ काली पट्टी बाँध ली
बेसबब ही ढो़ रहे है कर्मो के बोझ
ऐ जिंदगी तुझ पर बड़ा ऐतबार था

ऐ जिंदगी मुश्किलों को टाल
राहतों का हमें इंतजार था।

रहमतों की हिमायत में जी रहे है
तल्खियों के कई घूंट हम पी रहे है
मुस्कराती नहीं अब जिंदगानी मेरी
ऐ जिंदगी हमको तुम्ही से प्यार था

ऐ जिंदगी मुश्किलों को टाल
राहतों का हमें इंतजार था।

दफन कर दिये हर एक ख्वाब को
दबा बैठे है अपनी ही आवाज़ को
बेसबर कट रही है जिंदगानी मेरी
ऐ जिंदगी दिल में मेरे गुबार था

ऐ जिंदगी मुश्किलों को टाल
राहतों का हमें इंतजार था।

बेकरारी का आलम यूं ही ढ़ल गया
है खुमारी का आलम, पता चल गया
इश्क में इश्क की बात हमने की थी
ऐ जिंदगी वो मेरा आखिरी कुसूर था

ऐ जिंदगी मुश्किलों को टाल
राहतों का हमें इंतजार था।

बहता है दिल में अब लावा सा कोई
रहता है मुझे अब पछतावा सा कोई
हमें ख़्वाहिशों से अब कितना गिला है
ऐ जिंदगी मिला न कुछ खोया बहुत था

ऐ जिंदगी मुश्किलों को टाल
राहतों का हमें इंतजार था।

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प्रवीण

धन्यवाद।

Praveen Kucheria

Praveen Kucheria

मेरा नाम प्रवीण हैं। मैं हैदराबाद में रहता हूँ। मुझे बचपन से ही लिखने का शौक है ,मैं अपनी माँ की याद में अक्सर कुछ ना कुछ लिखता रहता हूँ ,मैं चाहूंगा कि मेरी रचनाएं सभी पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें।

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