देश के वीरों पर कविता :- उसी पथ पे हम भी | Desh Ke Veero Par Kavita

Desh Ke Veero Par Kavita हमारे देश के वीरों द्वारा अपनाए पथ पर चलने के लिए प्रेरित करती देश के वीरों पर कविता :-

Desh Ke Veero Par Kavita
देश के वीरों पर कविता

देश के वीरों पर कविता

अमित आभा अवलोकित होती जहां में,
जहां वीर राणा शिवा का घराना,
जहां हल्दीघाटी मराठा की माटी
जहां युद्ध भूमि में अमरत्व पाना,

जिन्हे प्राप्त है देशभक्ति की शक्ति,
जहां स्वाभिमानी जवानी में पानी,
किया राष्ट्र को सब समर्पित स्वतः का,
भुजाओं में जिनके भवानी समानी,

जहां के सुरों में है वीरो की गाथा,
नारों में है देशभक्ति की ज्वाला,
रक्तिम कृपाने लहुपान करती,
काली को चढ़ती रही मुंड माला,

जहां जौहरी ज्वाल जगती रही है,
जहां खो गई मेरी मांएं सुताएं,
जहां वीर व्रतियों ने पाला प्रतिज्ञा,
सदा मातृभूमि का वैभव सजाए,

उसी पथ पे हम भी कदम अपना रख के,
उसी लक्ष्य पर आगे बढ़ते ही जाएं,
सुनाएं सदा प्रीत की रीत के गीत,
चलो आओ जीवन को उज्वल बनाएं,

पढ़िए :- वीरों को प्रणाम कविता “जिसमें स्वदेश का मान भरा”


रचनाकार  का परिचय

जितेंद्र कुमार यादव

नाम – जितेंद्र कुमार यादव
धाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश
स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई
शिक्षा – स्नातक

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