राष्ट्र प्रेम पर कविता :- राष्ट्र निर्मिति ध्येय हमारा

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राष्ट्र प्रेम पर कविता

राष्ट्र प्रेम पर कविता

पल भर मुझ में आलस ना हो – मन में हो यह भावना !!
राष्ट्र निर्मिति ध्येय हमारा – जगती रहे सदभावना !!

हम पुरुषार्थ के धनी बनें नित , कर्म से कौशल दिखलावें,
प्रार्थना का भाव हो मन में, जीवन धन्य बना जावें,
हो चरित्र निर्माण हमारा – जीवन की संकल्पना,
राष्ट्र निर्मिति ध्येय हमारा – जगती रहे सदभावना !!

कर्म शक्ति से ज्ञान को पावें, और सदाचारी बनें,
और कपट छल द्वेष दूर कर, सबके हितकारी बनें,
तन मन जीवन सब मंगल हो – योग की हो प्रस्थापना !!
राष्ट्र निर्मिति ध्येय हमारा – जगती रहे सदभावना !!

हम अच्छाई के राही हैं, राहें हमें बनाना है,
सत्पुरुषों के पद चिन्हों पर, निशदिन चलते जाना है,
हम जागेंगे देश जगेगा – यह ईश्वर से प्रार्थना !!
राष्ट्र निर्मिति ध्येय हमारा – जगती रहे सदभावना !!

नित्य नए संकल्प करें हम, संकल्पों से हो सिद्धि,
और निरंतर इस जीवन में, निशदिन आए समृद्धि,
सदाचार व्यवहार में हो नित – आदर्शों की स्थापना !!
राष्ट्र निर्मिति ध्येय हमारा – जगती रहे सदभावना !!

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रचनाकार का परिचय

जितेंद्र कुमार यादव

नाम – जितेंद्र कुमार यादव

धाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश

स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई

शिक्षा – स्नातक

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