कर्म पर हिंदी कविता :- कर्मयुद्ध के भीषण रण में

जीवन में कर्म कर के आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती प्रेरणादायक कर्म पर हिंदी कविता ” कर्मयुद्ध के भीषण रण में ” :-

कर्म पर हिंदी कविता

कर्मयुद्ध के भीषण रण में आगे तक बढ़ जाना है ।
आलस् और प्रमाद है दुश्मन इनको आज हराना है ।।
कर्मयुद्ध के भीषण रण में आगे तक बढ़ जाना है ।।

कर्म शक्ति का आवाहन हो और सभी पुरुषार्थ करें,
नव अभियान हो जन जीवन में, मनोभाव निस्वार्थ भरें,
और लक्ष्य के परम शिखर को कर्म योग से पाना है ।
कर्मयुद्ध के भीषण रण में आगे तक बढ़ जाना है ।।

बिना किए कुछ नही मिलेगा, यही सत्य है जीवन में,
सूर्य चंद्रमा धरती तारे, क्रियाशील है हर क्षण में,
अब अभाव में नहीं रहना है अब प्रभाव दिखलाना है ।
कर्म युद्ध के भीषण रण में आगे तक बढ़ जाना है ।।

सदाचार व्यवहार हो हममें, संस्कार मर्यादा हो,
परहित में नित जीवन जिएं सत्य कर्म का वादा हो,
भारत माता के पुत्रों में नित सामर्थ्य जगाना है ।
कर्म युद्ध के भीषण रण में आगे तक बढ़ जाना है ।।

हम जागेंगे राष्ट्र जगेगा देश धर्म जग जायेगा,
सकल विश्व को मार्ग दिखाने भारत आगे आयेगा,
सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का नित भाव जगाना है।
कर्मयुद्ध के भीषण रण में आगे तक बढ़ जाना है।।

नहीं रुकेंगे नहीं झुकेंगे और परिश्रम करेंगे हम,
समाज का आदर्श बनेंगे सब में भाव भरेंगे हम,
जीवन जिस माता ने दिया है उसका मान बढ़ाना है ।
कर्मयुद्ध के भीषण रण में आगे तक बढ़ जाना है ।।


रचनाकार  का परिचय

जितेंद्र कुमार यादव

नाम – जितेंद्र कुमार यादव

धाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश

स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई
शिक्षा – स्नातक

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