हिंदी कविता अपना अपना भाग्य | Hindi Kavita Apna Bhagya

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हिंदी कविता अपना अपना भाग्य

हिंदी कविता अपना अपना भाग्य

संसार की अजब गजब है लीला।
कोई खाने के लिए मेहनत करता।
कोई पचाने के लिए मेहनत करता।
सबकी अपनी-अपनी है भाग्य की लीला।

एक कुत्ता है जो सुखी हड्डियों को खाता।
एक वह कुत्ता है जो महंगी कारों में घूमता।
सबका अपना-अपना है भाग्यदाता।

मेहनत, मजदूरी से कमाने वाला नही है खुशहाल।
लंपट घूसखोर बेईमान हो रहे है मालामाल।
सबका अपना-अपना है भाग्य का कमाल।

साथ- साथ पढ़े, साथ- साथ रहवासी।
पर एक बना अफसर
दूसरा बना चपरासी।
सब अपने-अपने भाग्य का खा सी

पढ़ा लिखा ज्यादा नही पर बन बैठे नेताजी।
दिन दूनी रात चौगुनी होती गई।
क्या करेंगे मूल्ला और काजी।
सबका अपना-अपना है भाग्य राजी।

लाख करो जतन।
यदि है भाग्य प्रबल।
कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा।
दिनों-दिन बढ़ेगाउसका धन-बल।
सबको मिलता है अपने-अपने भाग्य का सम्बल।

समय से पहले और तकदीर से ज्यादा नहीं मिलेगा।
हंसराज हंस कहता है परम संतोषी ही सदा सुखी रहेगा।


“रचनाकार का परिचय

हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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