हिंदी कविता कौन थी वो :- प्रशांत त्रिपाठी द्वारा रचित कविता

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किसी खास की याद में हिंदी कविता कौन थी वो :-

हिंदी कविता कौन थी वो

हिंदी कविता कौन थी वो

कौन थी वो जो मुस्कुरा के चली गई,
मेरे दिल में प्रीत की आश जगा के चली गई।
जैसे पके फल को देखकर आता है मुंह में पानी,
वैसे ही मुझे इमली दिखा के चली गई।।

उसकी मुस्कान में क्या गजब का जादू था,
मुझको तो कर दिया ही बेकाबू था।
न जाने वो ऐसे क्यों मुस्कुराई होगी,
शायद उसकी मुस्कान में न उसका काबू था।।

मुस्कान उसकी इस कदर पहचान बन गई,
कुछ याद न रहा उसकी मुस्कान ही याद बन गई।
मुस्कान में ही शायद वो अपना नाम बता गई,
कोई कुछ कहे मेरे लिए तो वो मुस्कान ही हो गई।।

दिल की मोहब्बत होठों से झलक रहीं थीं
क्या पता चिंगारी उधर से भी सुलग रही थी।
जैसे चंदा के आने पर आता है सागर में ज्वार,
वैसे ही वो मुस्कान से हमें अगवा कर रही थी।।

उसके अधरो की मुस्कान गुलाब सी खिल गई,
यूं मानो बसंत आई पेड़ सारे नए कर गई।
दिल जोरो से धड़का पर क्या करू हाय,
न जाने किधर से आई और कहां चली गई।।

पढ़िए :- ग़ज़ल | सनम दीवानी हूँ तेरी


रचनाकार का परिचय :-

प्रशांत त्रिपाठी

नाम – प्रशांत त्रिपाठी
पिता – श्री शिवशंकर त्रिपाठी
पता – गोपालपुर नर्वल कानपुर नगर
रूचि – कविता लिखना और गणित विषय अध्यापन कार्य।

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