प्रेम भरी कविता – किसी मोड़ पर और माना कि तू अपना नहीं

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कविता किसी मोड़ पर

प्रेम भरी कविता

किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी।
कभी अलविदा न कहो दोस्तो ।

जिन्दगी के सफर मे
कभी न कभी फिर बात होगी।
फिर वही यादे फिर वही बातो
की शुरू बात होगी।

बक्त ने आज जुदा कर दिया
तो क्या फिर किसी मोड़ पर मुलाकात होगी।
बक्त के साथ साथ तुम बदले तो नही ।
उस बक्त यह पहचान होगी।


माना कि तू अपना नही है

माना कि तू
अपना नहीं है,
पर न जाने क्यों
तुझसे मोहब्बत बहुत है।

न कोई रस्मे
न कोई कसमे
मगर प्यार तेरा
सच्चा बहुत है।

अपनो की परिभाषा
आज तुझसे जानी
होकर पराया तू
अपना लगता बहुत है।

गैरो से तू अपना
कब बन गया,
यह प्यारा सा रिश्ता
निभाया बहुत है।

अपनो की जुरूरत
सुख दुख मे होती
तेरे अपनेपन ने
रुलाया बहुत है।

पढ़िए – तलाश पर कविता “किसे हम ढूंढ रहे हैं”


परिचय –

मै सौदामिनी खरे पति स्व0अशोक खरे जन्म तिथि 25/08/1963

मै एक शिक्षिका हूँ रायसेन जिले की निवासी हूँ ।हिन्दी साहित्य की सेवा करना अपना सौभाग्य समझती हूँ, सभी रस पर लेखन करना मेरी विधा गीत,गजल,दोहे छंद कविता नज्म आदि है।

अभी तक साझा संकलन, कश्तियो का सफर ,काव्य रंगोली में, तथा मासिक पत्रिका ग्यान सागर मे प्रकाशित हुई है हिन्दी भाषा डाट काम पर भी रचनाऐ प्रकाशित हुई है,नव सृजन कल्याण समिति की फाउन्डर मेम्बर मे मीडिया प्रभारी हूँ ।


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