इश्क पर कविता :- इश्क़ में धड़कनें फिर मचलने लगी

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इश्क का अहसास बहुत ही प्यारा होता है। जब ये किसी को हो जाता है ना तो वो अपनी सुध-बुध खो बैठता है। और क्या-क्या होता है उसके साथ आइये पढ़ते हैं इश्क पर कविता में :-

इश्क पर कविता

इश्क पर कविता

इश्क़ में धड़कनें, फिर मचलने लगी।

इश्क़ का कुछ असर, यूँ हुआ ख्वाबों में।
खोलता जब-कभी हूँ किताबों को मैं।
हर कहीं पन्नों में, तू ही दिखने लगी।
इश्क़ में धड़कनें, फिर मचलने लगी।

कर्म में लीन रह ता था मैं तो कभी।
तेरी ओर बढ़ रहा, काम छोड़ सभी।
दर्श तेरा हुआ नजरें डिगने लगी।
इश्क़ में धड़कनें फिर मचलने लगी।

हाल-ए-दिल पे सितम ऐसे तुम ढा गई।
हर अदा तेरी अब मुझको थी भा गई।
स्वर्ग की अप्सरा जैसी लगने लगी।
इश्क़ में धड़कनें फिर मचलने लगी।।

जादू सा छा गया, सुर्ख दिल पे मेरे।
साथ हो चल रहे हर कहीं तुम मेरे।
चोट गहरी थी जो, वो भी भरने लगी।
इश्क़ में धड़कनें फिर मचलने लगी।

इश्क़ में कैसी मुझको ये बंदिश हुई।
कौन पहले छुए, फिर ये रंजिश हुई।
सोचकर उँगलियाँ खुद में लड़ने लगी।
इश्क़ में धड़कनें फिर मचलने लगी।

सूरतों से है नहीं, सीरतों से है हुआ
इश्क़ सच्चा मुझे, सिर्फ तुमसे हुआ।
प्रेम की ये तपिश, अब तो बढ़ने लगी
इश्क़ में धड़कनें फिर मचलने लगी।

खो न दूँ तुझको मैं, ख्याल आने लगा
भरम था कुछ नया, जो सताने लगा।
धड़कनें सोचकर, यूँ ही डरने लगी।
इश्क़ में धड़कनें फिर मचलने लगी।

कुछ हालात बदले, कवि के भाव बदले
तुमको न थी खबर क्या से क्या मैं हुआ।
बेखबर यूँ हुआ, खुद को ही खो दिया।
ख्वाहिशें आसमां से उतरने लगी।
इश्क़ की राह में, तुम बदलने लगी।

दर्द जो है मिला इश्क़ की राह में,
छोड़कर तुम गए, गैर की पनाह में
न भूलेंगे हम कभी, तेरी बेवफाई को
इश्क़ की राह में, तुम बदलने लगी।

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रचनाकार का परिचय
हरीश चमोलीमेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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