जल संरक्षण पर कविता | Jal Sanrakshan Par Kavita

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आप पढ़ रहे हैं 22 मार्च को मनाये जाने वाले जल दिवस को समर्पित ” जल संरक्षण पर कविता ” :-

जल संरक्षण पर कविता

जल संरक्षण पर कविता

जल ही तो जीवन है
जल पर न हो कोई रण,
संरक्षण के करो अनेक उपाय
जल का करो पनर्भरण।

नासमझी में या समझकर
जो करते हैं पर्यावरण खराब,
वो जाने जल और पर्यावरण का
हैं चोली दामन का साथ।

जितना होवे आवश्यक
उतना पानी खर्च करो,
बूंद बूंद से भरता सागर
जमीन के अन्दर जल भरो।

जल के संरक्षण से तपन
जल स्तर बढ़ जायेगा,
तालाब किनारे पेड़ लगाओ
पर्यावरण बच जायेगा।

पढ़िए :- कविता पर्यावरण पर ” कहीं खो गया ” | Kavita Paryavaran Par


रचनाकार का परिचय

तेजेन्द्र कुमार वशिष्ठ तपन

यह कविता हमें भेजी है तेजेन्द्र कुमार वशिष्ठ तपन जी ने ग्राम व पोस्ट ननाखेडा, जनपद बदायूं, उत्तर प्रदेश से।

उनकी रचनाओं के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है जिनमे अमृता प्रीतम स्मृति कवयित्री सम्मान, बागेश्वरी साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान सहित कई अन्य पुरुस्कार भी हैं।

जल संरक्षण पर कविता ” ( Jal Sanrakshan Par Kavita ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

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